'गर्भावस्था के आधार पर महिला को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं कर सकते', इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला

अदालत ने कहा कि किसी महिला को मातृत्व और रोजगार में से किसी एक को चुनने के लिए बाध्य करना उसके प्रजनन अधिकार और आजीविका के अधिकार, दोनों का उल्लंघन है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ का यह आदेश 22 जुलाई को पारित किया गया, जिसे बृहस्पतिवार को अपलोड किया गया।

Allahabad High Court : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि गर्भावस्था किसी महिला को सरकारी रोजगार से वंचित करने का आधार नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि किसी महिला को मातृत्व और रोजगार में से किसी एक को चुनने के लिए बाध्य करना उसके प्रजनन अधिकार और आजीविका के अधिकार, दोनों का उल्लंघन है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ का यह आदेश 22 जुलाई को पारित किया गया, जिसे बृहस्पतिवार को अपलोड किया गया।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट।

यूपीएसएसएससी के फैसले के खिलाफ दिया आदेश

यह आदेश कोमल जायसवाल द्वारा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के उस निर्णय के खिलाफ दायर विशेष अपील पर दिया गया, जिसमें आयोग ने वन रक्षक एवं वन्यजीव रक्षक भर्ती के लिए उनकी शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) स्थगित करने का अनुरोध ठुकरा दिया था। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यूपीएसएसएससी के निर्णय के साथ-साथ एकल पीठ के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें जायसवाल की याचिका खारिज कर दी गई थी। अदालत ने आयोग को चार सप्ताह के भीतर उनकी पीईटी आयोजित करने का निर्देश दिया।

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