क्या बंद होंगी मेट्रो सेवाएं, हटेंगे बैरिकेड? दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट 13 निर्देशों में क्या-क्या, जानें

अवमानना याचिका में प्रतिवादी के तौर पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन डी. थारा का नाम है। आदेश के पैराग्राफ 13 में अदालत ने कथित अवमानना करने वालों को नोटिस जारी कर जवाबी हलफनामा और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

दिल्ली में प्रदर्शन,हिरासत और आवाजाही पर लगी पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कई अहम निर्देश दिए। अदालत ने जहां मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से चलाने पर जोर दिया, वहीं इंटरनेट बहाल रखने, सड़कों से बैरिकेडिंग की समीक्षा करने और शांतिपूर्ण तरीके से जुटे लोगों की गैरकानूनी हिरासत रोकने को भी कहा। इसके साथ ही, 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर केंद्र सरकार के गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।

सुप्रीम कोर्ट

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ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिल्ली में मेट्रो सेवाएं बंद की जा सकती हैं? क्या सड़कों पर लगे बैरिकेड हटाने होंगे? प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर अदालत ने क्या कहा? और किन अधिकारियों को अवमानना याचिका पर जवाब देना है? सुप्रीम कोर्ट के आदेश में इन सभी मुद्दों पर अहम निर्देश दिए गए हैं। आइए, जानते हैं अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा और 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण है।

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