Election Commission: चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव में धांधली और मतदाता सूची में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों का जवाब दिया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले आखिर एसआईआर क्यों कराया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता; चुनाव प्राधिकरण के समक्ष सत्तारूढ़ और विपक्षी दल समान हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (फोटो साभार: Election Commission)
इतनी हड़बड़ी में क्यों हो रहा SIR?
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव से पहले मतदाता सूची शुद्ध करनी चाहिए या बाद में? चुनाव से पहले मतदाता सूची शुद्ध होनी चाहिए और यह बात लोक प्रतिनिधित्व कानून कहता है कि हर चुनाव से पहले मतदाता सूची शुद्ध करनी पड़ेगी और यह चुनाव आयोग का चुनावी दायित्व है। उन्होंने कहा कि 24 जून से 20 जुलाई तक में ही एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो गई... बिहार में 2003 में एसआईआर हुआ था और उस समय 14 जुलाई से 14 अगस्त तक एसआईआर हुआ था। उस समय भी सफलतापूर्वक एसआईआर संपन्न हुआ था।
SIR पर गलत सूचना फैला रहे कुछ दल
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों में सभी त्रुटियों को दूर करना है और यह गंभीर चिंता का विषय है कि कुछ दल इसके बारे में गलत सूचना फैला रहे हैं। चुनाव आयोग का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और 'इंडिया' ब्लाक में शामिल अन्य दलों ने कथित 'वोट-चोरी' के खिलाफ चुनावी राज्य बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' शुरू की।
चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों के 'वोट चोरी' के आरोपों को निराधार करार दिया और कहा कि सभी हितधारक पारदर्शी तरीके से एसआईआर को सफल बनाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि कुछ दल और उनके नेता बिहार में एसआईआर के बारे में गलत सूचना फैला रहे हैं। चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों से बिहार में मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने का आग्रह करता है... अभी 15 दिन बाकी हैं।
