Sonam Wangchuk Breaks Fast: नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार से आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। यह घटनाक्रम केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह द्वारा बृहस्पतिवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात के बाद सामने आया। दोनों मंत्रियों ने वांगचुक को सरकार की ओर से आश्वासन दिया। हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चर्चा नहीं हुई फिर भी सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने का फैसला किया।
Sonam Wangchuk Breaks Fast: सरकार के लिखित आश्वासन के बाद 26 दिन का अनशन खत्म।
अनशन तोड़ने के बाद सोनम वांगचुक ने विस्तार से बताया कि आखिर उन्होंने ये फैसला क्यों लिया। उन्होंने कहा,"अब मेरे सामने दो रास्ते थे या तो मैं कई हफ्तों तक अनशन पर बैठा रहूं और शायद उसी में मेरी मृत्यु हो जाए। आप ही लोगों में से पिछले 2–3 हफ्तों से कई लोग मुझसे कह रहे थे कि मेरी जान ज़रूरी है, मुझे संघर्ष को आगे बढ़ाना है, इसलिए मेरा जीवित रहना आवश्यक है, लेकिन मैं यह भी नहीं मानता कि हमने कुछ हासिल नहीं किया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर क्या बोले वांगचुक?
सोनम वांगचुके ने कहा," दोस्तों, मेरा सोचने का तरीका थोड़ा अलग है। अगर वे इस्तीफा नहीं देते, तो इससे नुकसान हमें या बच्चों को नहीं होगा, बल्कि सरकार को ही होगा। इस छोटे से मुद्दे को टालकर वे स्वयं अपना नुकसान कर रहे हैं। यदि वे इस्तीफा दे देते, तो अब तक उनका सारा नुकसान रुक गया होता। इसलिए मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं थी। इसका समाधान तो अपने आप हो जाएगा। मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह था कि हमारे बच्चों पर कोई ऐसे मुकदमे दर्ज न हों।
उन्होंने आगे कहा कि आपको नहीं पता, मैंने लद्दाख में देखा है कि कैसे बच्चों को वर्षों तक एफआईआर के चक्कर में पड़कर अपना भविष्य खराब करना पड़ता है। ऐसा कुछ नहीं होगा यह आश्वासन हम उनसे प्राप्त करने में सफल हुए हैं और इससे मुझे खुशी है और जिन बच्चों की मृत्यु हुई है, उनके माता-पिता को मुआवज़ा दिया जाएगा। इससे भी मुझे खुशी है। भारत के लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर, संसद में, इस मुद्दे पर चर्चा भी होगी।
सरकार ने दिया लिखित आश्वासन
वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिन से सरकार के साथ इस बात को लेकर सख्त बातचीत चल रही थी। उनकी मांग थी कि उन्हें आश्वासन लिखित रूप में चाहिए। इसी वजह से फैसला होने में दो दिन का समय और लगा और उन्हें दो दिन और भूख हड़ताल पर बैठना पड़ा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ती तो वे और भी दिन बैठने को तैयार थे। आखिरकार आज सरकार ने लिखित आश्वासन दे दिया।वांगचुक ने आश्वासन में तीन प्रमुख बिंदुओं का किया जिक्र
सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन में तीन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। पहला, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। दूसरा, पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए संसद में विस्तृत चर्चा कर स्थायी समाधान तलाशा जाएगा। तीसरा, हालिया नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सरकार सकारात्मक रुख के साथ विचार करेगी।अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने लद्दाख एपेक्स बॉडी के उन सभी नेताओं का आभार व्यक्त किया, जो उनका समर्थन करने के लिए लद्दाख से दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के उन सांसदों का भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनसे मुलाकात कर समर्थन जताया। वांगचुक ने भावुक होते हुए कहा कि 26 दिनों के बाद उन्हें पहली बार कुछ खाने को मिला है। उन्होंने कहा, "यह स्वाद बेहद अच्छा लग रहा है, लेकिन भूख का अपना कोई स्वाद नहीं होता।"
