बिहार की राजनीति में क्यों अहम है 'लव कुश' समीकरण? चुनाव से पहले BJP ने दोनों को साधा

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Jan 29, 2024, 12:02 PM IST

Bihar Politics: बिहार में जातिगत जनगणना पर जो सर्वे रिपोर्ट आई है तो उसके मुताबिक राज्य में कुर्मी समुदाय की आबादी 2.87 फीसदी और कोइरी समाज की आबादी 4.21 प्रतिशत है। दोनों को मिला दें तो यह आंकड़ा 8 फीसदी से ज्यादा हो जाता है।

Bihar Politics: बिहार में बने नए राजनीतिक समीकरण का असर देश की राजनीति एवं आगामी चुनावों दोनों पर होने जा रहा है। चुनाव रणनीतिकार मानते हैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-यूनाइटेड के बीच हुई 'डील' से दोनों का फायदा होगा। चूंकि, बिहार की राजनीति जाति के इर्द-गिर्द घूमती है। इसलिए सरकार के गठन में इस समीकरण का खास ध्यान रखा गया है। विशेष तौर पर राज्य के 'लव कुश' समीकरण का। नीतीश की एनडीए में वापसी से 'लव कुश' का सामाजिक समीकरण और मजबूत हुआ। नीतीश कुमार जहां कुर्मी समुदाय से आते हैं वहीं, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कोईरी समुदाय से आते हैं। कुर्मी और कोइरी समुदाय के समीकरण को बिहार की राजनीति में 'लव कुश' नाम दिया जाता है।

Bihar politics

बिहार में बना नया राजनीतिक समीकरण।

कुर्मी-कोइरी आबादी करीब 8 फीसदी

बिहार में जातिगत जनगणना पर जो सर्वे रिपोर्ट आई है तो उसके मुताबिक राज्य में कुर्मी समुदाय की आबादी 2.87 फीसदी और कोइरी समाज की आबादी 4.21 प्रतिशत है। दोनों को मिला दें तो यह आंकड़ा 8 फीसदी से ज्यादा हो जाता है। यही नहीं, राज्य में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) की आबादी 36.01 प्रतिशत है। इस समुदाय पर नीतीश की अच्छी पकड़ और प्रभाव है। चुनाव में इस समुदाय का बड़ा हिस्सा नीतीश के साथ रहा है। अब जेडीयू और भाजपा के नजदीक आने से ईबीसी वोटों पर दोनों पार्टियां मजबूत हुई हैं।

End of Feed