Bushra Banos Transfer: पश्चिम बंगाल में 2021 बैच की मुस्लिम महिला IPS अधिकारी बुशरा बानो के अचानक हुए तबादले ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। यह कार्रवाई एक दक्षिणपंथी समूह द्वारा उनके एक यूट्यूब वीडियो में इस्तेमाल किए गए इस्लामिक अभिवादन 'अस्सलाम वालेकुम' पर आपत्ति जताए जाने के ठीक बाद हुई है। राज्य सरकार ने इस तबादले को एक 'सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया' बताया है, लेकिन विपक्षी दलों ने सरकार पर नफरत और धार्मिक पूर्वाग्रह के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।
बुशरा बानो के तबादले पर छिड़ा विवाद
क्या है पूरा विवाद?
IPS अधिकारी बुशरा बानो, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली हैं और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से शिक्षित हैं, खड़गपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर तैनात थीं। हाल ही में उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर सिविल सेवा (UPSC) की तैयारी कर रहे छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने सऊदी अरब में अपनी अध्यापन की नौकरी छोड़कर IPS बनने के अपने सफर को साझा किया था।
विवाद तब शुरू हुआ जब 'हिंदू लीगल फंड' नामक संगठन ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव को शिकायत भेजी। संगठन ने आरोप लगाया कि एक ऑन-ड्यूटी सरकारी अधिकारी को सार्वजनिक मंच पर राष्ट्रीय अभिव्यक्तियों जैसे 'वंदे मातरम' या 'जय हिंद' का प्रयोग करना चाहिए था। वीडियो की शुरुआत 'अस्सलाम वालेकुम' से करने और बीच में 'इंशाहल्लाह' और 'जजाकअल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई गई।
सोशल मीडिया पर कुछ दक्षिणपंथी खातों ने अधिकारी के खिलाफ ट्रोलिंग शुरू कर दी और 'UPSC जिहाद' जैसे आरोप लगाए। इस शिकायत के कुछ ही दिनों भीतर बुशरा बानो का तबादला खड़गपुर से करके स्टेट आर्म्ड पुलिस की 4थ बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर कर दिया गया।
विपक्ष और नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
तबादले की खबर सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर सरकार के रवैये की आलोचना की और कहा, एक मुस्लिम IPS अधिकारी द्वारा महज 'अस्सलाम वालेकुम' कहने पर तबादला कर देना हास्यास्पद और दुखद है। हम एक ऐसे देश बनते जा रहे हैं जो नफरत और कट्टरता के जहर से भरा है। बुशरा, हम आपके साथ हैं। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस मुद्दे पर IPS एसोसिएशन से हस्तक्षेप करने की मांग की और केंद्र सरकार से सवाल किया कि देश में कैसा माहौल बनाया जा रहा है।
मो. अजहरुद्दीन (पूर्व क्रिकेटर एवं तेलंगाना के मंत्री) ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि जब किसी लोक सेवक को केवल उसके सामान्य अभिवादन के लिए निशाना बनाया जाने लगे, तो यह अल्पसंख्यकों को गलत संदेश देता है।
सोशल मीडिया पर तुलना और बहस
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और पत्रकारों ने इस मामले की तुलना उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी अनुज चौधरी से की, जिन्हें वर्दी में एक धार्मिक यात्रा में गदा लेकर भाग लेते देखा गया था और बाद में उन्हें पदोन्नति भी मिली थी। आलोचकों का कहना है कि प्रशासनिक नियमों में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। फिलहाल, जहां प्रशासन इसे नियमित फेरबदल बता रहा है, वहीं इस मामले ने प्रशासनिक निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक नई बहस छेड़ दी है।
