Rahul Vs Modi: मोदी सरनेम बयान पर आपराधिक मामले में दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता चली गई है। इसे लेकर संसद में संग्राम मचा हुआ है और समूचा विपक्ष सरकार के विरोध पर उतर आया है। संसद में पहले से चल रहा गतिरोध अब और गहरा गया है। सोमवार को राहुल पर हुई कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं ने काले कपड़े पहनकर विरोध जताया।
राहुल गांधी अयोग्य करार
लोकसभा में मचा संग्राम
जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन हिबी ईडन, जोती मणि एस और राम्या हरिदास सदन के बीचों-बीच आ गए और अपने हाथों से कागज फाड़कर अध्यक्ष की ओर फेंका। कुछ सांसदों ने स्पीकर की ओर काला कपड़ा भी लहराया। इसे देखते हुए बिड़ला ने कार्यवाही शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। लेकिन कांग्रेस सांसदों ने विरोध जारी रखा और अध्यक्ष की कुर्सी की ओर फटे कागज फेंके। अध्यक्ष के सदन छोड़ने के बाद उनकी कुर्सी पर एक बैनर फेंका गया।
कांग्रेस सदस्यों के साथ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), वामपंथी और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सांसदों ने भी काले रंग के कपड़े पहने थे। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने मुंह पर काली पट्टी बांध ली। सांसदों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, 'जागो ईडी' और 'ईडी मोदानी भाई भाई'।
राहुल गांधी की संसद में गैर-मौजूदगी
बहरहाल, राहुल गांधी की संसद में गैर-मौजूदगी से कांग्रेस की ताकत कम जरूर हुई है। अडानी मामले सहित कई मुद्दों पर राहुल गांधी आक्रामक तरीके से लगातार सरकार को घेर रहे थे। ब्रिटेन के कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में भी उन्होने पेगासस और लोकतंत्र के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। इसे लेकर संसद में बीजेपी ने राहुल को निशाने पर लेते हुए उनकी माफी की मांग की, इससे सदन की कार्यवाही बाधित होती रही। राष्ट्रीय राजनीति में राहुल ही पीएम मोदी का सीधा मुकाबला करते दिख रहे थे। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखें तो राहुल कुछ कमजोर पड़ गए हैं। उनकी संसद में एंट्री बंद हो गई है और वह मीडिया के सामने नजर भी कम ही आ रहे हैं।
अब सवाल है कि अगर राहुल कमजोर पड़ गए तो 2024 चुनाव में वे कौन नेता होंगे जो मोदी-शाह का मुकाबला करने की ताकत रखते हैं। साफ तौर पर दो नेताओं के नाम सामने आते हैं। ये हैं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। दोनों ही नेताओं ने राहुल को अयोग्य ठहराने को सियासी बदला करार देते हुए केंद्र सरकार पर आक्रामक अंदाज में हमला बोला। खास तौर पर अरविंद केजरीवाल बहुत मुखर रहे। दोनों नेताओं ने बीजेपी का मुकाबला करने में दम भी दिखाया है। हालांकि, केसीआर, शरद पवार, अखिलेश यादव, स्टालिन जैसे नेता भले ही केंद्र और नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते रहे हों, लेकिन इनकी छवि इतनी मजबूत नहीं है कि 2024 में बड़ी चुनौती दे सकें। इसलिए ममता-केजरीवाल ही दौड़ में सबसे आगे दिखते हैं।
अरविंद केजरीवाल
आज के सियासी दौर में केजरीवाल एक बड़ी ताकत के रूप में उभरे हैं। वह हम मौके पर पीएम मोदी को चुनौती दे रहे हैं। मनीष सिसोदिया को जेल होने के बाद से वह केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर बहुत हमलावर हैं। दिल्ली से लेकर पंजाब और गुजरात तक वह बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं। 2024 के लिए विपक्ष के पास कोई चेहरा नहीं है। ऐसे में केजरीवाल ऐसे नेता के रूप में उभर सकते हैं जो पीएम मोदी और बीजेपी को कड़ी चुनौती दे सकते हैं। दिल्ली में उनके कामकाज पर जनता लगातार मुहर लगा रही है। पंजाब में सरकार बनाकर केजरीवाल ने इतिहास रचा है। ऐसे में 2024 चुनाव में केजरीवाल एक बड़े और मजबूत चेहरे के तौर पर सामने आ सकते हैं।
ममता बनर्जी
एक समय जब लग रहा था कि बंगाल में बीजेपी की आंधी में हर कोई उड़ जाएगा, सीएम ममता बनर्जी ने मोदी-शाह का रथ थाम लिया था। टीएमसी ने यहां उपचुनावों में भी अपना झंडा गाड़ा।
हालांकि त्रिपुरा चुनाव में ममता को झटका जरूर लगा, लेकिन बंगाल में उनकी ताकत कम नहीं हुई है। ममता के आक्रामक तेवर उन्हें बीजेपी के सामने सीधी चुनौती देने वाले नेता के तौर पर स्थापित करता है। राहुल मामले पर ममता ने भी केंद्र की सख्त आलोचना की है और संसद में कांग्रेस का साथ भी दिया है। 2024 चुनाव के लिए विपक्ष के पास एक मजबूत चेहरे की कमी है, ममता बनर्जी इस जगह को भर सकती हैं।
