राज्यसभा की टेबल पर रख दिए अपने 'पैर', कम्युनिस्टों ने क्यों काटी थी दोनों टांगें! सदानंदन मास्टर ने बयां की जुर्म...

C. Sadanandan Master : सी सदानंदन मास्टर और उनकी फैमिली का वामपंथी दल सीपीएम से नाता था, लेकिन अक्किथम की रचनाओं से प्रभावित होकर वह राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) के समर्थक बन गए, जो कम्युनिस्टों की नजर में गुनाह से कम नहीं था। आज सदानंदन मास्टर नकली पैरों के सहारे देश सेवा कर रहे हैं। उनके पैर कट गए, लेकिन उनका जज्बा और हौसला कभी नहीं टूटा...

C. Sadanandan Master ...मेरी उम्र 30 साल थी और मैं गांव-गांव जाकर बच्चों को शिक्षित करता था, लेकिन मैं ये काम उस जगह कर रहा था, जहां वामपंथियों का गढ़ था। इससे भी बुरा ये था कि जवानी के दिनों में ही मेरा नाता राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) से हो गया था, जो तथाकथित कम्युनिस्टों को रास नहीं आ रहा था। उन्होंने मुझे समाजसेवा और आरएसएस से दूरियां बनाने के लिए डराया-धमकाया, लेकिन मैं बिना डरे आगे बढ़ता जा रहा था। इसका खामियाजा ये हुआ कि विरोधियों ने जवानी में ही मेरी दोनों टांगें काट दीं। ये हृदय विदारक कहानी किसी आम आदमी की नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े केरल के राज्यसभा सांसद सदानंदन मास्टर की है।

MP C Sadanandan Master Controversy.

राज्यसभा सांसद सी सदानंदन मास्टर

साल 1994 था और तारीख थी 25 जनवरी। ये वो काला दिन था, जिसे खुद राज्यसभा सांसद सदानंदन सोचकर खुद को रोक नहीं पाते। दोनों टांगे कटने के बाद भी उन्होंने अपना काम जारी रखा फिर उनके साहस और सामाजिक कार्यों से प्रभावित होकर राष्ट्रपति द्रौपदि मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया। अब वे सदन से लोकतंत्र की दुहाई देने वालों को आईना दिखा रहे हैं। लेकिन, वे चर्चा के केंद्र में तब आ गए जब उन्होंने कम्युनिस्टों के जुर्म की कहानी सुनाते हुए अपने दोनों कृत्रिम पैर सदन की टेबल पर निकाल कर रख दिए, जिसके बाद संदन में हंगामा होने लगा।

End of Feed