Ajit Pawar Rebellion Flashback: भारतीय राजनीति में शरद पवार का बगावत से खास रिश्ता रहा है। राजनीतिक यात्रा में उन्होंने इंदिरा गांधी(Indira Gandhi) से और सोनिया गांधी(Sonia Gandhi) दोनों से बगावत की। लेकिन उन्होंने खुद नहीं सोचा होगा कि कोई उनका अपना बगावत कर देगा। बात यहां हम अजित पवार की कर रहे हैं जो शरद पवार के भतीजे हैं, अजित पवार के बारे में कहा जाता है कि वो अपने पिता से भी अधिकर स्नेह शरद पवार से किया करते थे और शरद पवार भी उनसे उतना ही स्नेह करते थे। लेकिन सियासी महत्वाकांक्षा में रिश्ता आड़े आया। अजित पवार(Ajit Pawar) को लगने लगा था कि शायद उन्हें सियासी तौर वनवास में भेजने की कवायद चल रही है। उन्हें मौके का इंतजार था और वो साल भी आया।
अजित पवार, शरद पवार के भतीजे हैं
अजित पवार के बगावती सुर
2019 महाराष्ट्र विधानसभा(Maharashtra Political crisis 2019) चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना(shivsena) और बीजेपी(BJP में सीएम की कुर्सी को लेकर तनाव चरम पर था। एक दिन अल सुबह टीवी स्क्रीन पर हर किसी ने देखा कि गवर्नर हाउस में दो लोगों को शपथ दिलाई जा रही है जिसमें एक शख्स देवेंद्र फडणवीस और दूसरे अजित पवार था। अजित पवार के शपथ लेने का मतलब साफ था कि चाचा की पार्टी में अब फूट पड़ चुकी है। शरद पवार के लिए यह किसी बड़े घटनाक्रम से कम नहीं था।1999 में जब विदेशी मूल के मुद्दे पर शरद पवार को कांग्रेस ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया तो उन्होंने एनसीपी का गठन किया था। 20 साल बाद 1999 में उनकी पार्टी एक बड़े संकट का सामना कर रही थी जिसका सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि उनका खुद का भतीजा था।
'लोक माझे सांगाती' में खास जिक्र
अपनी आत्मकथा में 'लोक माझे सांगाती' में में वो जिक्र करते हैं कि जब उन्हें पता चला कि ऐसा कुछ हो गया तो वो हतप्रभ थे। मामला सिर्फ सियासी नहीं बल्कि पारिवारिक था। उनके सामने कई तरह की चुनौती थी। पार्टी को बचाए रखना, परिवार को बचाए रखना अहम जिम्मेदारी थी। उस हालात में अजित पवार के भाई श्रीनिवास को संदेशवाहक बनाया गया। अजित पवार, प्रतिभाताई(शरद पवार की पत्नी) से मिले और कहा कि वो उनकी नासमझी और गलती थी। शरद पवार लिखते हैं कि जब उन्हें जानकारी मिली तो उन्होंने कहा यह बहुत है और उसके बाद सबकुछ सामान्य हो गया।
