Asaduddin Owaisi : ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने पहलगाम आतंकी हमले पर एक रिपोर्टर के सवाल का जवाब दिलचस्प जवाब दिया है। मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में रिपोर्टर ने ओवैसी से पूछा कि 'मान लिया जाए कि पहलगाम आतंकी हमले के समय वह देश के यदि प्रधानमंत्री होते तो पाकिस्तान के खिलाफ उनकी क्या प्रतिक्रिया होती?' एआईएमआईएम मुखिया ने इस सवाल को खारिज कर दिया और कहा कि वे वास्तविकता में रहना और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ज्यादा पसंद करते हैं। वह इस तरह के ख्वाब नहीं देखते।
हैदराबाद से सांसद हैं असदुद्दीन ओवैसी। तस्वीर-PTI
मैं इस तरह के ख्वाब नहीं देखता-ओवैसी
AIMIM सुप्रीमो ने कहा कि 'मैं इस तरह के ख्वाब नहीं देखता। मैं वास्तविकता में जीता हूं और अपनी सीमा जानता हूं कि मेरी पहुंच कहां तक है। मेरा जीवन का लक्ष्य प्रधानमंत्री और मंत्री बनना नहीं हूं लेकिन मैं एक बात समझ नहीं पाता हूं कि पाकिस्तान को पूरी तरह सबक सिखाए बगैर आखिर अचानक से सीजाफायर क्यों हो गया? पाकिस्तान का दम निकालने का यह बिल्कुल सही मौका था। गुजरात, राजस्थान से लेकर कश्मीर सीमा तक पाकिस्तान के ड्रोन उड़ रहे थे। आप बाद में PoK लेने की बात करते हैं।'
'आईएसआई से खतरा बना रहेगा'
ओवैसी ने आगे कहा कि पाकिस्तान में सेना जब तक मजबूत रहेगी। उससे और आईएसआई से खतरा बना रहेगा। पाकिस्तानी सेना का पैसा पर्यटन, रीयल स्टेट में लगा हुआ है। उसके जनरल जब रिटायर होते हैं तो उन्हें दो-दो घर मिलते हैं।
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुआ आतंकी हमला
बीते 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई। इसके जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया। सरकार का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' खत्म नहीं हुआ है, उसे फिलहाल रोका गया है। छह और सात मई की दरम्यानी रात भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों, उनके भर्ती केंद्रों, मुख्यालयों को निशाना बनाकर हमले किए। हमलों में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों लश्कर ए तैयबा एवं जैश ए मोहम्मद के मुख्यालय को भी बर्बाद किया गया।
10 मई को लागू हुआ सीजफायर
इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने भारत के रिहायशी इलाकों एवं सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर ड्रोन एवं मिसाइल से हमले किए। फिर भारत ने पाकिस्तान के दर्जन भर से ज्यादा एयरबेस को बर्बाद कर दिया। भारत के हमलों से हताश एवं परेशान ने सीजफायर की गुहार लगाई। दोनों देशों के बीच डीजीएमओ स्तर की बातचीत में 10 मई को सीजफायर हुआ।
