न स्टील, न कील… सिर्फ रस्सी और लकड़ी, पहली समुद्री यात्रा पर निकला INSV कौंडिन्य; जिंदा हुई 1500 साल पुरानी विरासत

गुजरात के पोरबंदर से सोमवार को अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय समुद्री यात्रा पर ओमान के लिए रवाना हुआ आईएनएसवी कौंडिन्य पूरी तरह पारंपरिक सिलाई तकनीक से निर्मित है। इस पोत को पांचवीं शताब्दी के एक प्राचीन जहाज की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसकी प्रेरणा अजंता गुफाओं में बने एक ऐतिहासिक चित्र से ली गई है।

भारत ने पांचवी सदी की प्राचीन सिलाई तकनीक से एक जहाज बनाया है। इस जहाज में न तो इंजन लगा है और न ही धातु की कोई चीज। लकड़ी से बना, नारियल के रेशों से सिला और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाता यह जहाज उस युग की याद दिलाता है, जब भारतीय नाविक समुद्र को चुनौती नहीं देते थे, बल्कि उसे अपना साथी मानते थे। सितारे उनकी दिशा बताते थे, हवाएं उनकी ताकत बनती थीं। इसे आज पूरी दुनिया आईएनएसवी कौंडिन्य के नाम से जान रही है। आज हम इसकी बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज का दिन भारतीय नौसेना के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। दरअसल, आज इस आईएनएसवी कौंडिन्य ने गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट का अपना पहला सफर शुरू किया है। यह यात्रा केवल एक भौगोलिक दूरी तय करने की शुरुआत नहीं है, बल्कि लगभग डेढ़ हजार साल पुराने उस समुद्री अध्याय को फिर से भी खोल रही है जिसे इतिहास में दफन कर दिया गया था।

पहली समुद्री यात्रा पर निकला INSV कौंडिन्य। फोटो-PTI

पहली समुद्री यात्रा पर निकला INSV कौंडिन्य। फोटो-PTI

पांचवीं शताब्दी के एक प्राचीन जहाज की तर्ज पर तैयार किया गया

गुजरात के पोरबंदर से सोमवार को अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय समुद्री यात्रा पर ओमान के लिए रवाना हुआ आईएनएसवी कौंडिन्य पूरी तरह पारंपरिक सिलाई तकनीक से निर्मित है। इस पोत को पांचवीं शताब्दी के एक प्राचीन जहाज की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसकी प्रेरणा अजंता गुफाओं में बने एक ऐतिहासिक चित्र से ली गई है।

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