ये 'कोटा ड्रग्स' क्या है, जो बिहार के युवाओ को कर रहा बर्बाद? शराबबंदी वाले राज्य में सूखे नशे का कहर

बिहार कहने के लिए तो ड्राई स्टेट है, जहां शराब तक बैन है, लेकिन शराब छोड़िए अब तो ड्रग्स तक गांव-गांव में मिल रहा है। बिहार का 'कोटा ड्रग्स' युवाओं की जिंदगी बर्दाद कर रहा है।

बिहार में शराबबंदी लागू हुए लगभग एक दशक बीत चुका है। इस फैसले के पीछे शराब की खपत घटाने और उससे जुड़ी सामाजिक समस्याओं पर लगाम लगाने का मकसद था। हालांकि, अब राज्य में नशीले पदार्थों की बढ़ती उपलब्धता एक नई चुनौती बनती नजर आ रही है। बिहार में सूखा नशा गांव-गांव तक पहुंच चुका है। गांजा और हेरोइन से लेकर नशीली गोलियों तक, ड्रग्स की तस्करी और इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। ‘कोटा’ नाम का नशीला पदार्थ भी चर्चा में है, जिसने पुलिस और प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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बिहार में बढ़ रहा सूखे नशे का प्रकोप (प्रतीकात्मक फोटो- Canva)

बिहार में बढ़ रहे हैं नशे से जुड़े मामले

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से पिछले 10 सालों में, राज्य भर में पुलिस ने लगभग 3.16 करोड़ लीटर शराब जब्त की है और इससे जुड़े मामलों में करीब 7.15 लाख गिरफ्तारियां की हैं - यानी हर दिन औसतन 8,650 लीटर शराब की जब्ती और 196 गिरफ्तारियां। यह तो सबको पता है। लेकिन, जिस बात पर किसी का ध्यान नहीं गया, वह यह है कि तस्करी की जाने वाली शराब के अलावा, नशीले पदार्थों की एक समानांतर दुनिया भी पनप रही है। इसमें छोटी थैलियां, टैबलेट की स्ट्रिप्स, हेरोइन (और 'कोटा' नाम का एक खास किस्म का ड्रग्स), शीशियां, साबुन के डिब्बे, और यहां तक कि कपड़ों (जैसे पेटीकोट) की तहों में छिपाकर लाए जाने वाले नशीले पदार्थ भी शामिल हैं।

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