France में 33 साल पहले Hijab पर जो हुआ वहीं इतिहास भारत में दोहराया जा रहा है! जानकर रह जाएंगे दंग

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  • Updated Oct 22, 2022, 09:19 AM IST

फ्रांस वो देश है जहां अभिव्यक्ति की आजादी, समानता, सेक्युलरिज्म को बहुत महत्व दिया जाता है, जहां ये माना जाता है कि धर्म और राज्य अलग-अलग चीजें हैं दोनों का मिश्रण नहीं हो सकता है, उस फ्रांस में 80 के दशक में जो चीजें शुरू हुई उससे कट्टरपंथी हावी होने लगे।

Hijab Controversy: इतने साल हो गए लेकिन देश ने कभी ऐसा नहीं देखा कि हिजाब (Hijab) पर कोई विवाद हुआ हो। कभी ऐसा नहीं देखा कि क्लासरूम के अंदर स्टूडेंट हिजाब पहनने की जिद कर रहे हों। कभी ऐसा नहीं देखा कि ऐसा मामला देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच जाए और अदालत भी इस मामले में साफ फैसला ना दे पाए और ये मामला बड़ी बेंच के पास चला जाए। लेकिन ये पूरा विवाद आपके लिए नया होगा, दुनिया के लिए नहीं। दुनिया में फ्रांस (France) जैसा विकसित और ताकतवर देश भी है, जहां हिजाब को लेकर उसी तरह की जिद शुरू हुई थी, जिस तरीके से आज भारत में हो रहा है। हमने आपको ईरान के बारे में बताया था कि कैसे ईरान (Iran) 50 साल में इतना कट्टरपंथी हो गया कि वहां हिजाब ना पहनने पर मार दिया जाता है। आज आपको बताउंगा फ्रांस के बारे में बताएंगे। कि फ्रांस जैसे सेक्युलर देश में कैसे कट्टरपंथी हावी हो गए। और इन कट्टरपंथियों ने हिजाब का हुबहू वही विवाद बनाया, जो भारत (India) में हो रहा है।

33 साल पुरानी है कहानी

फ्रांस में हिजाब विवाद की ये कहानी 33 साल पुरानी है। वहां पर पेरिस के पास एक शहर है सिरील। सिरील में एक जूनियर हाई स्कूल है, जिसका नाम है गैब्रियल हैवेज। 18 सितंबर 1989 को इस स्कूल की तीन छात्राएं हिजाब पहनकर स्कूल आई। इसमें 14 साल की फातिमा, फातिमा की 15 साल की बहन लैला और उनकी 14 साल की दोस्त समीरा थी। स्कूल के प्रिंसिपल अर्नेस्ट चेनीअर्स (Ernest Chenieres) ने इस बात पर आपत्ति जताई । तीनों छात्राओं को क्लास में जाने नहीं दिया गया, उन्हें लाइब्रेरी में ही बिठाया गया। स्कूल के प्रिंसिपल ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा दोबारा हुआ तो उन्हें सस्पेंड कर दिया जाएगा, लेकिन लड़कियां हिजाब पहनने पर अड़ी रही। जिसके बाद स्कूल ने सख्त कदम उठाते हुए तीन लड़कियों को सस्पेंड कर दिया। जिन तीन लड़कियों को स्कूल में हिजाब पहनने पर सस्पेंड किया गया उन्हें पहले कई बार स्कूल प्रिंसिपल की तरफ से चेतावनी दी जा चुकी थी।

लड़कियों को कर दिया गया सस्पेंड

आप इस कहानी को समझते जाइए आपको लगेगा कि यही तो कर्नाटक के हिजाब विवाद में हुआ। जिन 3 मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने पर स्कूल से सस्पेंड किया गया उसमें से फातिमा और लैला के पिता ने उनका नाम स्कूल से कटवा दिया। और इसी के बाद फ्रांस में सेक्युलरिज्म के सिद्धांत और लड़कियों के शिक्षा के अधिकार और धार्मिक आजादी के बीच बहस शुरू हो गई। ठीक वैसे ही जैसे कर्नाटक में हुआ। फ्रांस में ये मामला इतना बढ़ गया कि 9 अक्टूबर 1989 को शिक्षा विभाग को दखल देना पड़ा। लोकल अथॉरिटी, पैरेंट्स और स्कूल के बीच एक समझौता हुआ और तीनों लड़कियां फिर स्कूल आने लगी। वो समझौता क्या था ? तीन मुस्लिम लड़कियों को स्कूल में हिजाब पहनकर आने की इजाजत दे दी गई। ये भी भरोसा दिया गया कि वो हिजाब पहनकर आएंगी और कोई उनकी एंट्री नहीं रोकेगा।

हूबहू कर्नाटक जैसा

अब आप इसे कर्नाटक के हिजाब से जोड़ सकते हैं। कर्नाटक में भी जो सरकारी आदेश है वो छात्राओं को क्लासरूम के अंदर हिजाब पहनने से रोकता है।

मुस्लिम लड़कियों और स्कूल के बीच समझौता तो हो गया लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। समझौते के 10 दिन बाद तीनों छात्राओं ने तय समझौते को तोड़ा और क्लास रूस में भी हिजाब पहनकर आने लगी। लड़कियों ने क्लासरूम में हिजाब को हटाने से इनकार कर दिया । जिसका नतीजा ये हुआ कि तीनों मुस्लिम लड़कियों को फिर से स्कूल से सस्पेंड दिया गया। तीनों मुस्लिम लड़कियों के फिर से Suspension के बाद फ्रांस में ये मुद्दा और बड़ा हो गया। फ्रांस की मीडिया में इस पर जबरदस्त बहस शुरू हो गई। इस घटना का असर ये हुआ कि फ्रांस के कई स्कूलों में हिजाब से जुड़े विवाद बढ़ने लगे। मुस्लिम लड़कियां स्कूल में हिजाब पहनने की जिद करने लगी और स्कूल इस बात पर अड़े रहे कि ये फ्रांस के सेक्युलरिज्म के खिलाफ है। उसी साल पेरिस में कई मुस्लिम सगठनों ने तीनों लड़कियों के समर्थन में मार्च निकाला। हिजाब के समर्थन में होने वाले प्रदर्शन कट्टरपंथियों के लिए कट्टर विचार रखने का मंच बन गए। इन प्रदर्शनों में मुस्लिम महिलाएं चादर पहनकर आने लगीं ऐसा माहौल बना दिया गया जैसे फ्रांस में मुस्लिम खतरे में हैं ।

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