Holding Centres Bengal: पश्चिम बंगाल सरकार बांग्लादेश सीमा के पास नए होल्डिंग सेंटर बनाने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार उत्तर 24 परगना जिले में स्थित पेट्रापोल बॉर्डर (Petrapole Border) के आसपास ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, अगर जरूरत पड़ी तो इन केंद्रों का इस्तेमाल सीमा से जुड़े संवेदनशील मामलों को संभालने के लिए किया जाएगा। पीटीआई के मुताबिक पेट्रापोल सीमा के पास पिरोजपुर इलाके में मौजूद सरकारी आवासीय परिसर को अस्थायी होल्डिंग सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा जयंतीपुर इलाके में भी जमीन की तलाश की जा रही है, जहां भविष्य में इसी तरह की व्यवस्था बनाई जा सके।
सीमा क्षेत्रों में बढ़ी गतिविधियों के बीच प्रशासन अलर्ट (Photo: AI Generated)
गुरुवार को वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम ने पिरोजपुर स्थित सरकारी परिसर का दौरा किया। अधिकारियों ने वहां की सुरक्षा, जगह और दूसरी जरूरी सुविधाओं का निरीक्षण किया। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल यह सिर्फ शुरुआती जांच और तैयारी का हिस्सा है।
सरकार की ओर से अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि इन होल्डिंग सेंटरों की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सीमा से लगे इलाकों में हाल के दिनों में गतिविधियां बढ़ी हैं।
पेट्रापोल देश के सबसे व्यस्त भूमि बंदरगाहों में से एक
पीटीआई के अनुसार इसी वजह से प्रशासन पहले से तैयारी करना चाहता है ताकि किसी भी स्थिति को आसानी से संभाला जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को अस्थायी रूप से रखने के लिए यह व्यवस्था की जा सकती है। पेट्रापोल देश के सबसे व्यस्त भूमि बंदरगाहों में से एक माना जाता है, जहां पिछले कुछ समय में गतिविधियां काफी बढ़ी हैं।
मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में बन चुके ऐसे होल्डिंग सेंटर
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार इससे पहले मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में भी ऐसे होल्डिंग सेंटर बना चुकी है। वहां अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया था। राज्य के गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग की विदेशी शाखा ने 23 मई को जिला अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गिरफ्तार विदेशी नागरिकों और जेल से रिहा किए गए विदेशी कैदियों को रखने के लिए जरूरी ढांचा तैयार किया जाए, ताकि उन्हें निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखा जा सके।
