Weather Update: एक सदी (100 साल) से भी ज्यादा समय के सबसे सूखे जून के बाद, अब मौसम का सबसे खौफनाक और चौंकाने वाला रूप सामने आने वाला है। भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार बेहद आक्रामक अंदाज में वापसी कर रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 15 दिन पूरे देश, खासकर उत्तर भारत के लिए बेहद नाजुक और डराने वाले साबित हो सकते हैं। कई चक्रवाती प्रणालियों (Weather Systems) के एक्टिव होने से उत्तर भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश का ऐसा दौर शुरू होने वाला है, जो राहत के साथ-साथ आफत भी ला सकता है।
अगले 15 दिन बेहद भारी...दिल्ली, यूपी समेत इन राज्यों पर मंडराया 'आफत की बारिश' का खतरा, मानसून को लेकर अलर्ट जारी (istock)
आसमान से बरसेगी आफत? दो 'लो-प्रेशर' सिस्टम हो रहे एक्टिव
इस बार मौसम का जो मिजाज बदल रहा है, उसने वैज्ञानिकों को भी चिंता में डाल दिया है। वायुमंडल में एक बेहद दुर्लभ और डरावना संयोजन (Rare Combination) बन रहा है। सैटेलाइट मॉडल से संकेत मिले हैं कि देश में दो कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Areas) लगभग एक ही समय पर विकसित हो रहे हैं-एक मध्य भारत के ऊपर और दूसरा बंगाल की खाड़ी में।
इन दोनों के एक साथ एक्टिव होने और मानसून ट्रफ के उत्तर भारत की ओर बढ़ने से जुलाई के पहले पखवाड़े (शुरुआती 15 दिनों) में मानसून रौद्र रूप अख्तियार कर सकता है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ और भारी तबाही का डर बना हुआ है।
केरल, महाराष्ट्र ट्रेलर, अब इन राज्यों की बारी (1-2 जुलाई)
मानसून के इस खतरनाक कमबैक का असर पश्चिमी तट पर दिखना शुरू हो गया है। केरल, तटीय कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में भारी बारिश ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अरब सागर से उठने वाली नमी से भरी तेज हवाओं के कारण इस सप्ताह के मध्य से पश्चिमी घाटों में 'अत्यंत भारी बारिश' होने की आशंका है।
इसके बाद यह रेन बेल्ट तेजी से देश के अंदरूनी हिस्सों को अपनी चपेट में लेगी। 1 और 2 जुलाई को निम्नलिखित राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है, जिससे स्थानीय स्तर पर अचानक बाढ़ (Flash Floods) और गंभीर जलभराव का खतरा पैदा हो गया है:
-उत्तर प्रदेश
-बिहार
-मध्य प्रदेश
-ओडिशा
-छत्तीसगढ़
-महाराष्ट्र
दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब में 3 से 6 जुलाई का अलर्ट
भीषण हीटवेव और दम घुटने वाली उमस झेल रहे उत्तर भारत में मौसम का मिजाज अब खतरनाक तरीके से पलटने वाला है।
शुरुआती दौर (1-2 जुलाई): दिल्ली-NCR, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ छिटपुट आंधी और बौछारें पड़ेंगी।
खतरनाक दौर (3-6 जुलाई): असली डर 3 जुलाई के बाद शुरू होगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ये छिटपुट बौछारें बेहद संगठित होकर 'मूसलाधार और व्यापक' बारिश में बदल जाएंगी। इसी दौरान दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में मानसून अपनी औपचारिक और आक्रामक दस्तक देगा, जिससे सड़कों के तालाब बनने और यातायात ठप होने का डर है।
40% की भारी कमी के बाद क्यों जरूरी है यह बारिश?
खतरे और डर के बीच यह बारिश देश के लिए संजीवनी भी है। भारत ने जून के महीने को 40 प्रतिशत की भारी बारिश की कमी (Rainfall Deficit) के साथ खत्म किया है, जिससे यह 1901 के बाद से पांचवां सबसे सूखा जून बन गया है। पानी की कमी के कारण खरीफ फसलों की बुआई बुरी तरह रुक गई है और जमीन की नमी खत्म हो चुकी है।
मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हालांकि भारी बारिश से यात्रा में रुकावटें आएंगी, निचले इलाकों में पानी भरेगा और बाढ़ जैसे हालात बनेंगे, लेकिन जलाशयों को भरने, भीषण गर्मी से निजात पाने और देश की कृषि व्यवस्था को बचाने के लिए जुलाई के ये 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने सभी संवेदनशील राज्यों को अलर्ट पर रहने को कहा है।
