न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में मोहन भागवत के संबोधन पर भारत में नई सियासी बहस छिड़ गई है। यहां एक ओर जहां भाजपा के कई नेता संघ प्रमुख के संबोधन की तारीफ कर रहे हैं और उसके समर्थन में हैं। वहीं कांग्रेस संघ प्रमुख की टिप्पणियों को लेकर हमलावर है। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर निशाना साधा है। सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि भागवत की बातें सुनकर उन्हें लगा कि यह राहुल गांधी का भाषण है या RSS प्रमुख का।
कपिल सिब्बल
दरअसल, मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम को संबोधित किया था। यहां भारतीय-अमेरिकी समुदाय और विभिन्न धर्मों के 6,000 से अधिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि ‘विविधता में एकता’ भारत के डीएनए में है। उन्होंने विविधता को मनाने,उसका सम्मान करने और उसे स्वीकार करने की बात कही।
अब संघ प्रमुख के इस बयान पर सिब्बल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होने कहा कि विदेश में विविधता को स्वीकार करने की बात कही जाती है,लेकिन भारत में इसी भावना को लेकर सवाल उठते हैं। सिब्बल मे सवाल किया कि आप विदेश में विविधता स्वीकार करते हैं, लेकिन घर में विविधता को बर्दाश्त नहीं करते।
उन्होंने कहा कि भागवत जब न्यूयॉर्क में भारत एक-दूसरे के लिए महसूस करता है जैसी बातें कर रहे थे, तो उन्हें राहुल गांधी के बयानों की याद आ गई। सिब्बल ने सवाल किया कि जब भारत में मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं होती हैं,तब क्या लोगों के प्रति वही संवेदना दिखाई जाती है?
सिब्बल ने राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिंदू और राम भक्त होने पर गर्व किया जा सकता है, लेकिन विविधता के सम्मान की बात करने वालों को उन घटनाओं पर भी बोलना चाहिए जो मंदिर निर्माण से पहले हुई थीं।
उन्होंने भागवत के बयान में इस्तेमाल किए गए चार शब्दों विविधता का जश्न,सम्मान, स्वीकार और संरक्षण का जिक्र करते हुए पूछा कि भारत में जब विविधता कथित तौर पर खतरे में होती है,तब RSS प्रमुख ने कितनी बार आवाज उठाई। सिब्बल ने आरोप लगाया कि भागवत ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं जो उनके मुताबिक विविधता को स्वीकार, सम्मान और संरक्षित नहीं करती। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में अलग दर्शकों के सामने अलग संदेश दिया जा रहा है।
भागवत ने अपने भाषण में यह भी कहा था कि विविधता भारत की एकता को सजाती है और इसे स्वीकार करना तथा सम्मान देना जरूरी है। उन्होंने भारत की बहुलतावादी परंपरा को दुनिया के सामने रखने की बात कही।
