वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम (To Lam) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 5 से 7 मई 2026 तक भारत की अपनी पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा पर रहेंगे। इस उच्च-स्तरीय यात्रा के दौरान उनके साथ वियतनाम सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और एक शक्तिशाली व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का दल भी भारत पहुंचेगा।
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम 5 से 7 मई के बीच भारत की यात्रा पर आ रहे हैं।
ब्रह्मोस मिसाइल डील पर लग सकती है मुहर
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण 6 मई को राष्ट्रपति भवन में होने वाला औपचारिक स्वागत और प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता है। इस बैठक में दोनों नेता समुद्री सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। उनकी इस यात्रा पर भारत और वियतनाम के बीच ₹5,800 करोड़ ($700 मिलियन डॉलर) की ब्रह्मोस मिसाइल डील हो सकती है।
बोधगया और मुंबई का भी करेंगे दौरा
यह दौरा कूटनीतिक रूप से इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह भारत और वियतनाम के बीच 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है, जिसकी शुरुआत 2016 में पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान हुई थी। अपनी व्यस्त राजकीय गतिविधियों के अलावा, राष्ट्रपति टो लैम भारत की आध्यात्मिक और आर्थिक विविधता को करीब से देखने के लिए बोधगया और मुंबई का भी दौरा करेंगे।
राष्ट्रपति टो लैम की भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के साथ भी मुलाकात तय है, जो दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगी। यह यात्रा न केवल नए निवेशों के द्वार खोलेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के एक नए युग की शुरुआत भी करेगी।
बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली इस बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों को एक नई गति मिलने और भारत तथा वियतनाम के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
