लद्दाख के नागरिकों को कानूनी सहायता और न्याय पाने में होने वाली असुविधा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लद्दाख में 'जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय' की एक स्थायी पीठ (बेंच) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
कानूनी सेवाओं के लिए नहीं काटना पड़ेगा लंबा चक्कर! (फाइल फोटो)
इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि यह कदम दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए न्याय तक पहुंच को बेहद आसान बनाएगा। पहले स्थानीय निवासियों को अदालती कार्यवाही और कानूनी सेवाओं के लिए लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता था। अब इस निर्णय से उन्हें अपने ही क्षेत्र में त्वरित और सुलभ न्याय मिल सकेगा।
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साल 2019 में जम्मू-कश्मीर व लद्दाख बने थे दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश
गृह मंत्री ने दोहराया कि मोदी सरकार लद्दाख के सर्वांगीण विकास और वहां के नागरिकों को सभी संवैधानिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A को हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था, जिसके बाद से ही लद्दाख में अलग हाई कोर्ट बेंच की मांग की जा रही थी।
कैबिनेट ने कुछ अन्य प्रमुख परियोजनाओं को भी दी मंजूरी
इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने कुछ अन्य प्रमुख परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाले चार प्रमुख रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स और बिहार में NH-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को 3,590.73 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन बनाने का निर्णय शामिल है।
