'शिंदे गुट के 22 विधायक बागी होकर थामेंगे BJP का दामन' उद्धव नीत शिवसेना ने किया बड़ा दावा

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  • Updated Oct 24, 2022, 11:03 AM IST

Shiv Sena News: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने रविवार को अपने मुखपत्र सामना में दावा किया कि शिवसेना के 40 बागी विधायकों में से 22 जल्द ही भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक भूचाल आ सकता है, और ये दावा कोई और नहीं बल्कि उद्धव (Uddhav Thackeray) गुट की शिवसेना ने किया है। अपने मुखपत्र सामना के साप्ताहिक कॉलम में दावा किया गया है, 'अब सभी समझ गए हैं कि उनकी (शिंदे) मुख्यमंत्री की वर्दी कभी भी उतार दी जाएगी.. महाराष्ट्र की ग्राम पंचायत, सरपंच चुनाव में शिंदे गुट की सफलता का दावा झूठा है। शिंदे गुट (Eknath Shinde) के कम-से-कम 22 विधायक नाराज हैं। इनमें से ज्यादातर विधायक खुद को भाजपा में विलीन कर लेंगे, ऐसा साफ दिख रहा है। उसके बाद शिंदे का क्या होगा? ऐसा जब मैंने उनके एक नेता से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, `शिंदे का रामदास आठवले होगा।’ यह कथन सही है।'

Shinde and Uddhav News

सामना में लिखे लेख में शिवसेना का बड़ा दावा

निशाने पर शिंदे

लेख में सीएम शिंदे पर हमला करते हुए कहा गया, 'दिवाली साल में एक बार आती है लेकिन राजनीति के पटाखे किसी भी समय फूटते रहते हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे पुलिस विभाग में हुए तबादलों पर नाराज हुए और सातारा स्थित उनके गांव जाने की जानकारी एक खबरिया चैनल ने दी। यह उतना सच नहीं लग रहा है। मुख्यमंत्री नाराज हुए होंगे तो भी श्री फडणवीस को दुत्कार, थोड़ा नाराज होकर गांव जाकर बैठेंगे, ऐसी स्थिति नहीं है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की मेहरबानी पर उनका मुख्यमंत्री पद टिका हुआ है और शिंदे का राजनीतिक अस्तित्व उसी मुख्यमंत्री पद पर ही टिका है। इसलिए भाजपा श्री शिंदे को गुदगुदी करके मारेगी।'

राज्यपाल पर हमला

इस लेख में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर हमला किया गया है और लिखा गया है, 'महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी अब कहां भूमिगत हो गए हैं, इस बारे में कोई खुलासा करेगा क्या? मूलरूप से हमारे राज्यपाल राजभवन में हैं या नहीं, इसे गृहमंत्री श्री फडणवीस को जनता के सामने लाना चाहिए। `ठाकरे’ सरकार के दौरान मौजूदा राज्यपाल महोदय काम करते-करते थकते जा रहे थे। बाढ़ की स्थिति में स्वतंत्र दौरा आयोजित कर प्रशासन को अलग निर्देश दे रहे थे। कई अन्य प्रशासनिक कार्यों में सीधे तौर पर उनका हस्तक्षेप था।'

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