आज करीब 20 साल बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ एक मंच पर दिखे। मराठी-हिंदी भाषा विवाद को लेकर राज ठाकरे ने न सिर्फ भाजपा सरकार को घेरा बल्कि मराठा साम्राज्य की भी याद दिला गए। इस दौरान उद्धव ठाकरे उनके पीछे बैठकर, उनका भाषण सुनते रहे। वहीं, उद्धव ठाकरे ने मंच पर आते ही कहा कि राज ठाकरे ने बहुत कुछ बोल दिया, क्या मुझे कुछ बोलने की जरूरत है?
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे
ये भी पढ़ें- बिहार में नए समीकरण की आहट! महागठबंधन के साथ जाने को बेताब AIMIM, लालू को खुद ओवैसी की पार्टी के नेता ने लिखा खत
हिंदी अच्छी भाषा है, लेकिन इसे थोपा नहीं जा सकता- राज ठाकरे
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि मराठा साम्राज्य अपने शासन काल में देश के तत्कालीन 125 राज्यों तक था..तो क्या मराठी सिखाने की जबरदस्ती की गई थी? हम शांत हैं तो बेवकूफ नहीं हैं..मुम्बई को किसी ने महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश की तो छोड़ेंगे नहीं। राज ठाकरे ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हम शांत हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी से डरते हैं। मुंबई को महाराष्ट्र से कोई भी अलग नहीं कर सकता। हिंदी अच्छी भाषा है, लेकिन इसे थोपा नहीं जा सकता है। हिंदी बोलने वाले महाराष्ट्र में रोजगार के लिए आते हैं। मनसे अध्यक्ष ने कहा- "एक मंत्री मुझसे मिले और अपनी बात सुनाने को कहा। मैंने साफ कहा कि मैं सुनूंगा पर मानूंगा नहीं। मैंने उनसे सवाल किया कि उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में तीसरी भाषा क्या होगी। ये सभी हिंदी भाषी राज्य हमसे पीछे हैं, हम उनसे आगे हैं, फिर हमें जबरन हिंदी क्यों सीखनी पड़े? तो यह अन्याय है।"
तीन भाषा का फॉर्मूला कहां से आया?
उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि तीन भाषा का फॉर्मूला कहां से आया? ये सिर्फ केंद्र सरकार से आया है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ अंग्रेजी में है, किसी और राज्य में ऐसा नहीं है। सिर्फ महाराष्ट्र में ही ऐसा क्यों? जब महाराष्ट्र जागता है, तो दुनिया देखती है। मराठा शासन हिंदी भाषा से भी पुराना है। मेरे पिता और बाला साहेब ने भी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाई की थी। क्या आपने कभी उनके मराठी या महाराष्ट्र प्रेम पर सवाल उठाया?
हम हिंदी थोपना बर्दाश्त नहीं करेंगे- ठाकरे
राज ठाकरे ने कहा कि हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम जाते हैं तो हमारी मराठी पर सवाल उठते हैं। लालकृष्ण आडवाणी मिशनरी स्कूल में पढ़े हैं तो क्या उनके हिंदुत्व पर सवाल उठाएं? हम हिंदी थोपना बर्दाश्त नहीं करेंगे। वे बस मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहते हैं, यही उनका एजेंडा है। वे मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। अब वे यह मुद्दा उठा रहे हैं कि ठाकरे के बच्चे अंग्रेजी में पढ़े हैं। यह क्या बकवास है? कई भाजपा नेताओं ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की है, लेकिन किसी को उनके हिंदुत्व पर संदेह है। उन्होंने कहा, "दक्षिण में स्टालिन, कनिमोझी, जयललिता, नारा लोकेश और सूर्या, सभी ने अंग्रेजी में पढ़ाई की है। बालासाहेब और मेरे पिता श्रीकांत ठाकरे ने अंग्रेजी में पढ़ाई की है, लेकिन वे मातृभाषा मराठी के प्रति बहुत संवेदनशील थे। बालासाहेब ठाकरे ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की, लेकिन उन्होंने मराठी भाषा से समझौता नहीं किया। किसी को भी मराठी को तिरछी नजर से नहीं देखना चाहिए।"
