Winter Session: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी अगले महीने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और उससे कथित तौर पर जुड़ी मौतों का मुद्दा उठाएगी। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी निर्वाचन आयोग पर कम अवधि और ‘अव्यवहारिक समय-सीमा’ तय करके जमीनी स्तर के कर्मचारियों पर ‘एसआईआर से जुड़ा अमानवीय दबाव’ डालने का आरोप लगा रही है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
केंद्र से तीखे सवाल पूछने की तैयारी में तृणमूल
पार्टी ने दावा किया कि मतदाता सूची में त्वरित संशोधन से बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) और नागरिकों में भय, थकान और मौत की घटनाएं हुईं।
पार्टी नेता ने कहा कि पार्टी सवाल उठाएगी कि पश्चिम बंगाल में सबसे गहन जांच क्यों की गई, जबकि समान जनसांख्यिकीय प्रोफाइल वाले कई सीमावर्ती राज्यों को एसआईआर से छूट दी गई है। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वह एसआईआर के लिए राज्यों के चयन पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगेगी।
कब से शुरू हो रहा शीतकालीन सत्र?
पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा, ‘‘बांग्लादेश और म्यांमा जैसे देशों के साथ सीमा साझा करने वाले त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर को पूरी तरह से छूट क्यों दी गई है? असम में विशेष संशोधन की प्रक्रिया कमजोर क्यों है? क्या असली इरादा बंगाली पहचान को चुनौती देना और बंगाली मतदाताओं को मतदाता सूची से व्यवस्थित रूप से हटाना है?’’ संसद का शीतकालीन सत्र एक से 19 दिसंबर के बीच चलेगा।
वरिष्ठ टीएमसी नेताओं ने कहा कि नवंबर की शुरुआत में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया गया मतदाता सूची संशोधन पश्चिम बंगाल में ‘असाधारण जल्दबाजी’ के साथ किया गया है, जिससे नागरिकों में दहशत फैल गई और बूथ स्तर के अधिकारियों (BJP) पर ‘अभूतपूर्व बोझ’ पड़ा गया जिनमें से कई कथित तौर पर शिक्षण कर्तव्यों और देर रात तक चलने वाले गणना कार्य से जूझते हुए मर गए हैं।’’ पार्टी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक चार बीएलओ सहित 41 लोगों की मौत हो चुकी है।
कुछ मृतकों के परिवारों ने मौत का कारण समय सीमा की कमी, अपर्याप्त प्रशिक्षण और भारी भरकम प्रक्रिया से उपजे तनाव को बताया है। एक टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया, ‘‘जिस काम में आमतौर पर दो से तीन साल लगने चाहिए, उसे केंद्र में बैठे राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए दो महीनों में समेट दिया गया है।’’
बंगाल में कहां तक पहुंची SIR प्रक्रिया
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया लगभग पूरा होने वाली है जहां 7.64 करोड़ प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, 82 प्रतिशत डिजिटल हो चुके हैं और घर-घर जाकर सत्यापन अभियान के तहत 99.8 प्रतिशत मतदाता शामिल किये जा चुके हैं। अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी, 2026 को प्रकाशित होने की उम्मीद है। टीएमसी ने पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों में हस्तक्षेप करने और निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर जवाबदेही के लिए दबाव बनाने की योजना बनाई है।
