Saket Gokhale Letter Dharmendra Pradhan: नीट (NEET) और सीबीएसई (CBSE) परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के आंदोलन को लेकर सियासी पारा बेहद गर्म हो गया है। बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता साकेत गोखले ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक बेहद तीखा पत्र लिखा है। गोखले ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को 'अगर कुछ भी हुआ' तो इसके लिए सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार और खुद शिक्षा मंत्री जिम्मेदार होंगे।
'वांगचुक को कुछ हुआ तो जिम्मेदार होगी केंद्र सरकार': TMC नेता साकेत गोखले का धर्मेंद्र प्रधान को पत्र, बातचीत शुरू करने की मांग
गोखले ने शिक्षा मंत्री से अपनी चुप्पी तोड़ने और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों के साथ तुरंत बातचीत का रास्ता खोलने की अपील की है।
'18 दिन में 8 किलो वजन घटा, हालत बेहद नाजुक'
TMC नेता साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपने इस पत्र को साझा करते हुए सोनम वांगचुक की सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक का वजन अब तक 8 किलोग्राम से अधिक घट चुका है और उनकी शारीरिक स्थिति 'अत्यधिक नाजुक' बनी हुई है, जिसके चलते उन्हें चौबीसों घंटे डॉक्टरों की मेडिकल निगरानी में रखा गया है।
गोखले ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'यह बेहद शर्मनाक और निराशाजनक है कि एक सच्चा गांधीवादी देश के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए आंदोलन कर रहा है, लेकिन मोदी सरकार की तरफ से इस पर एक शर्मनाक चुप्पी साधी गई है। क्या यह सरकार इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि उसे वांगचुक की जान की भी परवाह नहीं है?'
पेपर लीक के तनाव में 12 छात्रों ने की आत्महत्या
साकेत गोखले ने अपने पत्र में पेपर लीक के कारण देश के युवाओं पर पड़े मानसिक दबाव का जिक्र करते हुए बेहद भावुक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने लिखा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक से पैदा हुए भारी तनाव के कारण 12 युवा छात्र अब तक आत्महत्या कर चुके हैं। गोखले ने कहा कि हम यहां उन निर्दोष जिंदगियों की बात कर रहे हैं जो सिर्फ इसलिए खत्म हो गईं क्योंकि देश के भ्रष्ट और लाचार सिस्टम ने उन्हें पूरी तरह निराश कर दिया।
पत्र में सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित करते हुए गोखले ने कहा कि वांगचुक और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग नीट परीक्षा में हुई ऐतिहासिक विफलता को लेकर उनके इस्तीफे की है।
गोखले ने शिक्षा मंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'एक टीवी इंटरव्यू में आपने खुद इस मामले में अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की है। एक जीवंत लोकतंत्र में, इतनी बड़ी विफलता के बाद जिम्मेदार मंत्री के लिए सबसे सही और नैतिक कदम इस्तीफा देना ही होता है। लेकिन तथ्य यह है कि आपने इस्तीफे की पेशकश तक नहीं की, जो देश के लाखों छात्रों और युवाओं की सबसे बड़ी शिकायत है। आप इस्तीफा देते हैं या नहीं, यह आपके अपने नैतिक विवेक पर निर्भर करता है, लेकिन कम से कम वांगचुक से बात न करना एक नए निचले स्तर को दर्शाता है।'
बता दें कि सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को विपक्ष का पूरा समर्थन मिल रहा है। साकेत गोखले का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने फोन पर सोनम वांगचुक से बात कर उनकी सेहत का हालचाल जाना था और इस लड़ाई में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया था। इसके साथ ही टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने भी जंतर-मंतर जाकर आंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया है। विपक्ष का साफ कहना है कि सरकार भले ही कितनी भी हठधर्मिता दिखाए, लेकिन देश के छात्रों के भविष्य और सोनम वांगचुक की जिंदगी के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
