Sushmita Dev Resigns Rajya Sabha: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान अब खुलकर सतह पर आने लगा है। पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के ठीक कुछ दिनों बाद, अब टीएमसी की तेजतर्रार नेता सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया है। वह जल्द भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से भी मिलेंगी।
ममता बनर्जी को एक और करारा झटका, सुष्मिता देव ने भी दिया राज्यसभा से इस्तीफा; असम सीएम हिमंता से मिलने पहुंचीं
महज एक हफ्ते के भीतर राज्यसभा के दो बड़े और कद्दावर सांसदों के बैक-टू-बैक इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक गहरा सियासी संकट खड़ा कर दिया है। सुष्मिता देव के इस अचानक उठाए गए कदम के बाद से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार बेहद गर्म हो गया है और पार्टी के भीतर गुटबाजी व मतभेदों की खबरें तेज हो गई हैं।
एक हफ्ते के भीतर दूसरा बड़ा विकेट
सुष्मिता देव कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुई थीं और उन्हें ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता था। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजने के साथ-साथ असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में टीएमसी का आधार मजबूत करने की एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। अब जहां खबर है कि देव इस्तीफे के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मासे मिलने पहुंचीं हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव ने अपने राजनीतिक भविष्य और पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रमों पर खुलकर अपनी बात रखी है। उनके इस बयान को सही और व्यवस्थित रूप में नीचे दिया गया है:
राजनीतिक भविष्य पर सुष्मिता देव का बयान आया। उन्होंने कहा, 'राजनीति और समाज सेवा का मेरा यह सफर आगे भी जारी रहेगा। मैं आगे क्या करने वाली हूं और मेरा अगला कदम क्या होगा, यह पूरी तरह से मैं खुद तय करूंगी और सही समय आने पर आप सभी को इसके बारे में जरूर बताऊंगी।'
ममता बनर्जी और TMC के आंतरिक संकट पर कहा, 'मैं ममता दीदी के विषय में कोई भी बयान या टिप्पणी नहीं दूंगी। जहां तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे घटनाक्रमों या अन्य इस्तीफों का सवाल है, तो मुझे इसकी अंदरूनी जानकारी नहीं है। मैं सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय या शामिल नहीं हूं, इसलिए वहां क्या हो रहा है, यह वहां के लोग ही बेहतर बता पाएंगे।'
हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात पर कहा, 'असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (हिमंत दा) से मेरे बहुत पुराने और पारिवारिक संबंध हैं। उनके साथ हुई मेरी हालिया मुलाकात महज एक शिष्टाचार भेंट थी, इसके अलावा इसका कोई और राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।'
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुष्मिता देव का जाना टीएमसी के लिए एक दोहरा झटका है। पहला झटका पश्चिम बंगाल की आंतरिक राजनीति के लिहाज से है और दूसरा राष्ट्रीय स्तर पर, क्योंकि पूर्वोत्तर भारत (खासकर असम) में पैर पसारने की कोशिशों में जुटी टीएमसी के लिए सुष्मिता देव वहां सबसे प्रमुख चेहरा थीं।
सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के बाद बढ़ा तनाव
गौरतलब है कि कुछ ही दिनों पहले टीएमसी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार सुखेंदु शेखर राय ने भी राज्यसभा की सदस्यता से अचानक इस्तीफा दे दिया था। सुखेंदु शेखर के इस्तीफे के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि सुष्मिता देव के इस कदम ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की रणनीतियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
