'सुरक्षित रखे जाएंगे सीसीटीवी फुटेज और वीवीपैट', ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट मामले पर याचिका सुनेगा कलकत्ता हाई कोर्ट

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर सियासी संघर्ष तेज हो गया है। ममता बनर्जी गुट का दावा है कि पार्टी की नई 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) की सूची बागी गुट के समानांतर नेतृत्व घोषित करने से पहले ही चुनाव आयोग को सौंप दी गई थी। नई संरचना में ममता बनर्जी को अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी की उस चुनावी याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से सुवेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने निर्वाचन क्षेत्र से CCTV फुटेज, EVM और VVPAT मशीनों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। टीएमसी सांसद व वकील कल्याण बनर्जी ने चुनाव नतीजों पर हाई कोर्ट में सुनवाई पर बताया कि ममता बनर्जी ने जो चुनावी याचिका दर्ज की थी, उसी याचिका पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने कहा था 12 राउंड तक मतगणना ठीक थी। 13वें राउंड में जब शुभेंदु अधिकारी काउंटिंग हॉल में घुसे तो उन्होंने भाजपा के काउंटिंग एजेंट को निर्देश दिया कि TMC के काउंटिंग एजेंट को भगा दो, उन लोगों ने मारकर भगा दिया।

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ममता कैंप ने बनाई नई कार्यकारिणी, बागी गुट ने पेश किया समानांतर नेतृत्व। ANI

सीआईएसएफ की उन्होंने मदद ली। हमने मांग की कि CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। सब कुछ CCTV, VVPAT, कैमरे और EVM मशीनें—सुरक्षित रखी जानी चाहिए। 2021 में नंदीग्राम में जो रिटर्निंग ऑफिसर थे उन्हें भवानीपुर चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया। उन्होंने सिर्फ शुभेंदु अधिकारी की बात सुनी और किसी की बात नहीं सुनी। जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने इस रिटर्निंग ऑफिसर को CMO कार्यालय का संयुक्त सचिव बचाया। पक्षपात भेदभाव किया गया। मुख्य चुनाव अधिकारी को भी बाद में मुख्य सचीव बना दिया गया, सुब्रत गुप्ता जो स्पेशल पर्यवेक्षक थे उन्हें भी विशेष सचिव बनाया गया। यह सब पक्षपात है।

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