कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी की उस चुनावी याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से सुवेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने निर्वाचन क्षेत्र से CCTV फुटेज, EVM और VVPAT मशीनों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। टीएमसी सांसद व वकील कल्याण बनर्जी ने चुनाव नतीजों पर हाई कोर्ट में सुनवाई पर बताया कि ममता बनर्जी ने जो चुनावी याचिका दर्ज की थी, उसी याचिका पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने कहा था 12 राउंड तक मतगणना ठीक थी। 13वें राउंड में जब शुभेंदु अधिकारी काउंटिंग हॉल में घुसे तो उन्होंने भाजपा के काउंटिंग एजेंट को निर्देश दिया कि TMC के काउंटिंग एजेंट को भगा दो, उन लोगों ने मारकर भगा दिया।
ममता कैंप ने बनाई नई कार्यकारिणी, बागी गुट ने पेश किया समानांतर नेतृत्व। ANI
सीआईएसएफ की उन्होंने मदद ली। हमने मांग की कि CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। सब कुछ CCTV, VVPAT, कैमरे और EVM मशीनें—सुरक्षित रखी जानी चाहिए। 2021 में नंदीग्राम में जो रिटर्निंग ऑफिसर थे उन्हें भवानीपुर चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया। उन्होंने सिर्फ शुभेंदु अधिकारी की बात सुनी और किसी की बात नहीं सुनी। जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने इस रिटर्निंग ऑफिसर को CMO कार्यालय का संयुक्त सचिव बचाया। पक्षपात भेदभाव किया गया। मुख्य चुनाव अधिकारी को भी बाद में मुख्य सचीव बना दिया गया, सुब्रत गुप्ता जो स्पेशल पर्यवेक्षक थे उन्हें भी विशेष सचिव बनाया गया। यह सब पक्षपात है।
ममता गुट का दावा- बागियों से पहले EC को सौंप दी नई कमेटी की लिस्ट
वहीं, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर सियासी घमासान और भी तेज हो गया है। ममता बनर्जी गुट ने दावा किया है कि पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) को अंतिम रूप देकर उसकी लिस्ट बागी गुट के समानांतर नेतृत्व घोषित करने से पहले ही चुनाव आयोग (EC) को सौंप दी गई थी। ममता समर्थक नेताओं के मुताबिक, शनिवार को पार्टी की नई संगठनात्मक संरचना और 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी तय की गई थी और सोमवार को इसकी जानकारी चुनाव आयोग को भेज दी गई।
इस लिस्ट में ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष, सुब्रत बक्शी को उपाध्यक्ष, अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव, डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव तथा शुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। बताया जा रहा है कि इस नई टीम में कई ऐसे नेताओं को जगह नहीं दी गई, जो हाल के दिनों में बागी खेमे के साथ चले गए। वहीं राज्यसभा सांसद नदीमुल हक को नई संरचना में शामिल किया गया है।
बागी गुट ने क्या उठाए कदम?
दूसरी ओर, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को कोलकाता में विशेष बैठक कर अलग संगठनात्मक ढांचे का ऐलान किया और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष घोषित करते हुए 30 सदस्यीय नई कार्यकारिणी बना दी।
बागी गुट अब चुनाव अधिकारियों के सामने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस साबित करने की तैयारी में है। इसके तहत उनके नेता मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय पहुंचकर अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
इन नेताओं पर लगे पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप
इसी बीच टीएमसी की अनुशासन समिति ने फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह पूरा विवाद विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुए नेतृत्व संकट के बीच सामने आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब इस लड़ाई का अगला पड़ाव चुनाव आयोग और अदालत हो सकती है।
