Times Now Summit 2026: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को 'टाइम्स नाउ समिट 2026' में टाइम्स नेटवर्क की ग्रुप एडिटर-इन-चीफ नाविका कुमार के साथ बातचीत में विपक्ष के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। यह नाराजगी रेखा गुप्ता सरकार की लड़कियों को साइकिल बांटने की योजना को लेकर थी, जिसे लेकर विपक्ष सोशल मीडिया पर कटाक्ष कर रहा है। समिट में बोलते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "हमने यह महत्वपूर्ण पहल 'दिल्ली की बेटी' की शिक्षा के लिए योजना बनाई है, उन लड़कियों के लिए जो दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ती हैं और जिन्हें परिवहन की आसान सुविधा नहीं मिलती, जिनके माता-पिता को अक्सर उन्हें स्कूल तक साथ ले जाना पड़ता है।" गौरतलब है कि अपने विधानसभा क्षेत्र शालिमार बाग में छात्राओं को साइकिलें वितरित कर एक नई शुरुआत की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन छात्राओं की मदद करना है जिनके स्कूल घर से दूर हैं और जिनके पास आवाजाही के लिए सुगम साधन उपलब्ध नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अक्सर परिवहन की कमी के कारण माता-पिता को बेटियों को स्कूल भेजने में कठिनाई होती है, जिससे कई बार छात्राओं को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हर दिल्ली की बेटी के पास अपनी साइकिल होनी चाहिए ताकि उसका स्कूल जाना आसान हो। जब बेटी शिक्षित होगी, तभी वह अपना और देश का भविष्य बेहतर बनाएगी।"
टाइम्स नाउ समिट में बोलतीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
विपक्ष के कटाक्ष पर CM का कड़ा प्रहार
'टाइम्स नाउ समिट 2026' में बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस योजना पर बन रहे मीम्स और सोशल मीडिया पर किए जा रहे मजाक का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग बेटियों की शिक्षा से जुड़ी इस गंभीर पहल का मजाक उड़ाते हैं, उन्हें 'मानसिक रूप से दिवालिया' घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की आलोचना उनके हौसले कम नहीं कर सकती और यह योजना दिल्ली की हर हकदार बेटी तक पहुंचकर रहेगी।
बजट 2026-27: शिक्षा पर बड़ा निवेश
दिल्ली सरकार ने शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए इस योजना के लिए भारी भरकम बजट आवंटित किया है। वर्ष 2026-27 के बजट में करीब 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके जरिए नौवीं कक्षा की लगभग 1,30,000 छात्राओं को मुफ्त साइकिलें दी जाएंगी। यह कदम न केवल छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में उपस्थिति और शिक्षा के स्तर को सुधारने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
