नई दिल्ली, 26 मार्च 2026: प्रभावशाली पत्रकारिता के दो दशक पूरे होने के अवसर पर, टाइम्स नेटवर्क ने टाइम्स नाउ समिट 2026 के पहले दिन की शुरुआत आत्ममंथन और भविष्य की दिशा पर केंद्रित सार्थक संवाद के साथ की। इस वर्ष समिट की थीम “Celebrating Times Now @ 20, Shaping India @ 100” रखी गई है। इस समिट ने भारत की बदलती वैश्विक भूमिका, आर्थिक दिशा और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का माहौल तैयार किया।
टाइम्स नाउ समिट 2026, पहला दिन: समिट के उद्घाटन दिवस पर कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया
कार्यक्रम में थीम संबोधन टाइम्स ग्रुप के एमडी विनीत जैन ने दिया। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और विनीत जैन ने पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसके साथ भारत की विकास यात्रा को दिशा देने के उद्देश्य से दो दिनों तक होने वाली महत्वपूर्ण चर्चाओं की शुरुआत हुई। पूरे दिन उद्योग जगत के दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने विभिन्न मुद्दों पर गहन और उपयोगी चर्चा की।
टाइम्स ग्रुप के एमडी विनीत जैन ने कार्यक्रम का उद्घाटन एक दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ किया और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “इस साल यह समिट एक बड़े अर्थ के साथ आयोजित हो रहा है। हम टाइम्स नाउ के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, लेकिन यह केवल एक विरासत का उत्सव नहीं है। यह आने वाले सौ वर्षों की तैयारी का मंच है। यह भारत @100 को आकार देने की बात है। उन्होंने कहा कि आज भारत एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां तेज आर्थिक विकास, बड़ी युवा आबादी का लाभ, बढ़ती डिजिटल ताकत और दुनिया में बढ़ती अहमियत - ये सभी एक साथ आ गए हैं। भारत @100 का रास्ता केवल विकास से तय नहीं होगा। इसे मजबूती से तय करना होगा- संकल्प से, रणनीतिक सोच से, मजबूत संस्थानों के भरोसे से और सबसे बढ़कर, आत्मविश्वास को राष्ट्रीय क्षमता में बदलने से।”
दिन की एक खास और महत्वपूर्ण झलक यह रही कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और इजराइल दोनों देशों के प्रतिनिधि एक ही मंच पर मौजूद रहे। यह एक दुर्लभ और अहम स्थिति मानी गई। इजराइल दूतावास के राजदूत रियुवेन अजार ने क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की रणनीतिक जटिलताओं पर बात करते हुए ईरान के आकार और अमेरिका के पास मौजूद विकल्पों की व्यापकता को रेखांकित किया। जब उनसे अमेरिका द्वारा अपनी सेना को सक्रिय करने और मध्य पूर्व में सैनिक भेजने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा,
“ईरान एक ऐसा देश है, जो फ्रांस और जर्मनी- दोनों को मिलाकर भी उससे बड़ा है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि केवल 3,000 सैनिकों के साथ ईरान जैसे पूरे देश पर जमीनी हमला किया जा सकता है। यह जो दबाव बनाया जा रहा है, सबसे पहले तो यह एक बहुत स्पष्ट संदेश देता है कि यह अभियान जारी रह सकता है और इससे वहां की सरकार को नुकसान हो सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “साथ ही यह भी साफ है कि अमेरिका के पास अभी कई सैन्य विकल्प मौजूद हैं। हमने शुरुआत से ही कहा है कि हम ऐसे किसी भी परिदृश्य को खारिज नहीं करते, जिसमें विशेष कमांडो बलों का इस्तेमाल कर कुछ खास लक्ष्यों को हासिल किया जाए या कुछ रणनीतिक बढ़त प्राप्त की जाए। इसलिए यह संभावना पूरी तरह से बाहर नहीं है।”
एक अलग दृष्टिकोण पेश करते हुए, भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि के उप-प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियाईनिया ने युद्धविराम के लिए ईरान की तैयारी दोहराई, साथ ही राष्ट्रीय सम्मान के महत्व पर जोर देते हुए संघर्ष की शुरुआत और उसके जारी रहने पर सवाल उठाए। डॉ. मोहम्मद हुसैन जियाईनिया ने चल रहे युद्ध को लेकर ईरान की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा, “हम पूरी तरह से युद्धविराम के लिए तैयार हैं। जैसे हमें यह नहीं पता था कि युद्ध कब शुरू हुआ, क्योंकि हमने युद्ध शुरू नहीं किया, उसी तरह हमें यह भी नहीं पता कि वे इसे कब रोकना चाहते हैं। वे बमबारी कब खत्म करना चाहते हैं, यह अभियान कब समाप्त करना चाहते हैं, यह नरसंहार कब रोकना चाहते हैं और लोगों को निशाना बनाना कब बंद करना चाहते हैं?—यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए। आपने यह शुरू किया है, अब आप इसे खत्म कब करना चाहते हैं? यह राष्ट्र, यह देश-इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान-एक शांति चाहने वाला देश है, एक ऐसा देश जो युद्धविराम चाहता है, लेकिन साथ ही अपनी गरिमा की भी रक्षा करना चाहता है। गरिमा हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और हमने इंसान की गरिमा के लिए अपनी जिंदगी, अपने युवाओं और अपने बच्चों तक को समर्पित किया है।
भू-राजनीतिक मुद्दों पर चल रही चर्चा का असर घरेलू राजनीति में भी साफ दिखाई दिया, जहां एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस संकट से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके की तीखी आलोचना की। उन्होंने अधिक पारदर्शिता और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर सरकार के रुख और प्रतिक्रिया के समय पर सवाल उठाए। ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “सर्वदलीय बैठक, संसद में होने वाली चर्चा के बराबर नहीं होती। हमें सवाल पूछने का अधिकार है।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भारत को “किसी देश का एजेंट नहीं” कहने वाले बयान का क्या मतलब है। ओवैसी ने कहा, “आखिर एजेंट का मतलब क्या है? हमें सच बोलने से डर क्यों लगता है? अमेरिका और इजराइल को लेकर प्रधानमंत्री की ओर से कोई बयान क्यों नहीं आया?”
इसके अलावा, ओवैसी ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया में कथित देरी की भी आलोचना की और पूछा कि सरकार को शोक व्यक्त करने में पांच दिन क्यों लग गए।
भू-राजनीति से आगे बढ़ते हुए, इस समिट में विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों का भी जश्न मनाया गया, जहां खेल, मनोरंजन, शासन और मीडिया से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां एक साथ मंच पर नजर आईं। इस अवसर पर मंच की शोभा बढ़ाने वालों में भारतीय क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर, गायिका शिल्पा राव, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा शामिल थे।
एक महत्वपूर्ण घोषणा के तहत, टाइम्स नेटवर्क ने अपने नए लोगो का भी अनावरण किया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लिखित संदेश के माध्यम से सराहना की। इससे नेटवर्क के प्रभाव और व्यापक पहुंच को और मजबूती मिली।
समिट का पहला दिन केवल अपने बड़े पैमाने और व्यापक भागीदारी के कारण ही खास नहीं रहा, बल्कि इसलिए भी उल्लेखनीय रहा क्योंकि इसने सीमाओं और विचारधाराओं से परे जाकर सार्थक संवाद को बढ़ावा दिया। विभिन्न वैश्विक और घरेलू दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाकर, इस प्लेटफॉर्म ने ऐसे समय में संवाद को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका को फिर से साबित किया, जब दुनिया अवसरों और अनिश्चितताओं- दोनों का सामना कर रही है।
