बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में लौटी बाघों की उम्मीद, वाल्मीकि से लाई गई बाघिन को जंगल में छोड़ा गया

बक्सा उत्तर बंगाल में बाघों के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। वर्ष 1983 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह क्षेत्र भूटान और असम के जंगलों तथा संरक्षित इलाकों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे एक बड़े और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है।

भारत में बाघ संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में शुक्रवार को एक बाघिन को जंगल में छोड़ा गया। यह कदम बक्सा में बाघों की स्थायी और आत्मनिर्भर आबादी फिर से स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मौजूद रहे।

बक्सा टाइगर रिजर्व में लौटी बाघों की उम्मीद।

बक्सा टाइगर रिजर्व में लौटी बाघों की उम्मीद।

यह पहल वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत के साथ हुई है। बक्सा में बाघों की संख्या को फिर से बढ़ाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई इस बाघिन को जंगल में छोड़ने से पहले उसके स्वास्थ्य, पर्यावरणीय परिस्थितियों और प्रबंधन से जुड़े जरूरी पहलुओं का वैज्ञानिक आकलन किया गया।

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