FM Nirmala Sitharaman on Indian Economy: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि वे कौन सी चीजें हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही हैं। मंगलवार (11 अक्टूबर, 2022) को अमेरिका के वॉशिंगडन डीसी स्थित प्रतिष्ठित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट में एक सवाल के जवाब में वह बोलीं- आप सही हैं कि ऐसे बहुत सारे जोखिम (भारतीय अर्थव्यवस्था पर) हैं। पर मैं इन सभी को अपने देश की इकनॉमी पर बाहरी मानती हूं। ये सारी चीजें बाहर हो रही हैं और साफ तौर पर हम पर असर डाल रही हैं। हम उसकी गहराई को समझ रहे हैं और उसे जवाब भी दे रहे हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।
उन्होंने कहा, "फिर चाहे उर्वरक की कीमतें, ऊर्जा, न केवल कीमत, बल्कि उपलब्धता सरीखी भी चुनौतियां हैं...नतीजतन देश के कुछ हिस्से गंभीर खाद्य असुरक्षा में हैं।" उनके मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत न तो ‘पृथकतावाद’ है और ना ही ‘संरक्षणवाद’, बल्कि यह इस तथ्य की स्वीकार्यता है कि भारत को जीडीपी में अपनी विनिर्माण हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए। भारत में व्यापक तौर पर औद्योगिकीकरण नहीं हुआ क्योंकि इसके लिए अवसंरचना और संपर्क की कमी थी। देखें, उन्होंने कार्यक्रम के दौरान और क्या कहाः
#WATCH | "There are a lot of risks that are extraneous to the Indian economy. Fertilizer prices, energy, not just t… t.co/3tUkbg6fQt
— ANI (@ANI) Oct 12, 2022
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमने पिछले आठ साल में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है।’’ उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर’ भारत का गलत आशय निकाला जाता है, जबकि असल में यह इस तथ्य की स्वीकार्यता है कि भारत को कुशल और अर्द्धकुशल कामगारों के लिए रोजगार के अवसरों के सृजन के लिहाज से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अपनी विनिर्माण साझेदारी बढ़ानी चाहिए।
बकौल सीतारमण, "हम कई मुल्कों से बात कर रहे हैं। सिंगापुर और यूएई हमारे रुपे (RuPay) को अपने देशों में स्वीकार्य बनाने के लिए अब आगे आए हैं। इतना ही नहीं, यूपीआई भीम (UPI BHIM) ऐप अब इस तरह से काम कर रहा है कि उनके अपने-अपने देशों में सिस्टम हमारे सिस्टम से बात कर सकें।
