'नेहरू को इतिहास से मिटाने का अभियान...', राष्ट्रपति के संबोधन को लेकर कांग्रेस ने क्यों की ये टिप्पणी; जानें माजरा

Congress on President's Address: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या राष्ट्रपति के संबोधन पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने बड़ा दावा करते हुए ये कहा है कि राष्ट्रपति के संबोधन में नेहरू का जिक्र न होना इतिहास से उन्हें मिटाने के अभियान का हिस्सा है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट पर क्या कुछ कहा आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं।

New Delhi: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम के संबोधन में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख नहीं होना उन्हें इतिहास से मिटाने के लिए जारी अभियान का हिस्सा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, '14 अगस्त, 1947 की आधी रात को जवाहरलाल नेहरू ने (पुरानी संसद के) सेंट्रल हॉल में अपना नियति के साथ साक्षात्कार वाला भाषण दिया।'

Congress on President's Address

राष्ट्रपति के संबोधन पर कांग्रेस ने किया बड़ा दावा।

'नेहरू को इतिहास से मिटाने के अभियान का हिस्सा'

कांग्रेस नेता ने कहा, '15 अगस्त, 1947 को आकाशवाणी पर राष्ट्र के नाम उनका संबोधन प्रसारित हुआ, जिसकी शुरुआत उन्होंने खुद को 'भारतीय लोगों का पहला सेवक' बताते हुए की थी। 15 अगस्त 1947 की सुबह अखबारों में उनका राष्ट्र के नाम संदेश छपा था।' उन्होंने कहा, 'उसी दिन 14 मंत्रियों ने शपथ ली थी। ये थे नेहरू और सरदार पटेल के अलावा, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, डॉ. बी आर आंबेडकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जगजीवन राम, राजकुमारी अमृत कौर, सरदार बलदेव सिंह, सी.एच. भाभा, जॉन मथाई, आरके शनमुखम चेट्टी, एनवी गाडगिल और रफी अहमद किदवई। चार सप्ताह से भी कम समय के बाद, के सी नियोगी और गोपालस्वामी अय्यंगर ने भी शपथ ली। .... वह ऐसे शानदार व्यक्तित्वों से भरपूर एक अविश्वसनीय कैबिनेट थी।'

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