AIIMS on Tanvi Death Case: दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) ने 15 साल की तन्वी की मौत मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है। तन्वी दिल की एक जटिल जन्मजात बीमारी से पीड़ित 15 साल की मरीज थी और लगभग 14 साल तक संस्थान की देखरेख में रहने के बाद 1 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
AIIMS दिल्ली ने क्लीनिकल जांच के लिए कमेटी बनाई (प्रतीकात्मक फोटो)
यह कदम मीडिया रिपोर्टों और तन्वी की दिल की सर्जरी के लिए लंबे इंतजार पर जताई गई चिंताओं के बाद उठाया गया है। उसके माता-पिता का आरोप है कि सर्जरी सालों तक टलती रही।
तन्वी की सर्जरी में देरी और उसके बाद उसकी मौत के बारे में उनके वीडियो मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। यह सब इस प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल में सर्जरी का भारी बोझ, गंभीर मरीजों के इलाज में देरी और जान बचाने वाली प्रक्रियाओं के लिए लंबे इंतजार जैसी चिंताओं के बीच हुआ।
पहली जांच 10 अक्टूबर 2012 को AIIMS कार्डियोलॉजी OPD में हुई थी
2 सितंबर को जारी एक बयान में संस्थान ने कहा कि तन्वी की पहली जांच 10 अक्टूबर 2012 को AIIMS कार्डियोलॉजी OPD में हुई थी। तब उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया का पता चला था। यह दिल की एक गंभीर जन्मजात बीमारी है जिसमें दिल से फेफड़ों तक खून के बहाव का सामान्य रास्ता नहीं होता या बहुत बुरी तरह से रुका होता है।
क्या इस खराबी को सर्जरी से ठीक किया जा सकता है?
इसके बाद उसे कार्डियक सर्जरी टीम के पास भेजा गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस खराबी को सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। 2013 के दौरान, उसके दिल की बनावट को समझने और यह तय करने के लिए कि क्या सर्जरी संभव है, कई जांचें कीं, इनमें CT एंजियोग्राफी, पारंपरिक एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन शामिल थे।
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‘सर्जरी को मुमकिन नहीं माना गया’
AIIMS के अनुसार, इलाज करने वाली टीम ने 2017 में यह निष्कर्ष निकाला कि दिल की बनावट की जटिलता के कारण सर्जरी करना मुमकिन नहीं था। इसके बजाय, उसे मेडिकल मैनेजमेंट और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई। हालांकि, मामला मेडिकल समीक्षा के दायरे में रहा। मिली जानकारी के अनुसार, परिवार संस्थान के संपर्क में रहा और सर्जरी की संभावना के बारे में दूसरी जगहों पर भी राय लेता रहा।
24 अगस्त को तन्वी को वापस AIIMS लाया गया
पिछले साल ही, AIIMS में कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के तत्कालीन प्रमुख ने मेडिकल मैनेजमेंट जारी रखने की सलाह दी थी। परिवार ने एक और सीनियर कार्डियोथोरेसिक सर्जन से भी सलाह ली, जिन्होंने सर्जरी न करने की सलाह दी। तबीयत बिगड़ने के बाद इस साल 24 अगस्त को तन्वी को वापस एम्स (AIIMS) लाया गया। डॉक्टरों ने उसकी हालत की जांच की, जिसमें हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर भी विचार किया गया, क्योंकि उसकी दिल की बीमारी काफी बढ़ चुकी थी।1 सितंबर की सुबह उस किशोरी की मौत हो गई।
रिकॉर्ड की जांच के लिए कमेटी
एम्स की कमेटी घटनाओं के क्रम, क्लिनिकल रिकॉर्ड, जांच, किए गए इलाज, विशेषज्ञों की राय और उसकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करेगी। पोस्टमार्टम भी किया जा रहा है और उम्मीद है कि मेडिकल रिकॉर्ड के साथ-साथ इसकी रिपोर्ट पर भी विचार किया जाएगा।मरीज के परिवार की ओर से बार-बार सर्जरी टालने के गंभीर आरोपों को देखते हुए कमेटी की जांच अहम हो सकती है।केंद्र सरकार के इस प्रमुख संस्थान ने कहा है कि वह उसकी मौत की परिस्थितियों के बारे में कोई नतीजा निकालने से पहले कमेटी की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम का इंतजार करेगा।
