Nana Patekar Get Clean Chit in Me Too Case: मुंबई की एक अदालत ने अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा दायर यौन उत्पीड़न और मानहानि के मामले में सभी आरोपियों को राहत देते हुए बी-समरी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने अपने फैसले में दो घटनाओं- 2008 और 2018 के कानूनी पहलुओं की समीक्षा की और पाया कि पहला मामला कानूनी सीमा से बाहर है, जबकि दूसरे मामले में कोई आपराधिक इरादा साबित नहीं हुआ।
नाना पाटेकर को अदालत ने दी राहत, तनुश्री दत्ता ने लगाए थे 'Me Too' के आरोप।
नाना पाटेकर समेत इन लोगों पर तनुश्री दत्ता ने लगाए थे आरोप
पहली घटना 23 मार्च 2008 की थी, जिसमें तनुश्री दत्ता ने अभिनेता नाना पाटेकर, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य, निर्देशक राकेश सारंग और प्रोडक्शन टीम के सदस्य अब्दुल सामी सिद्दीकी पर आईपीसी की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने का प्रयास) और 509 (महिला का अपमान करने वाले शब्द या इशारे) के तहत आरोप लगाए थे। हालांकि, इस मामले में एफआईआर 10 साल बाद, 10 अक्टूबर 2018 को दर्ज की गई, जो सीआरपीसी की धारा 468(2)(c) के अनुसार तीन साल की कानूनी सीमा से काफी आगे थी। चूंकि न ही राज्य सरकार और न ही शिकायतकर्ता ने विलंब को माफ करने के लिए सीआरपीसी की धारा 473 के तहत कोई अर्जी दी, अदालत ने इस मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही, बल्कि केवल कानूनी आधार पर निर्णय ले रही है। इसलिए, बी-समरी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया, जिसका अर्थ है कि पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस सबूत नहीं पाया और इसे झूठा या दुर्भावनापूर्ण माना।
अदालत ने दूसरे मामले में भी तनुश्री दत्ता के आरोप को खारिज किया
दूसरी घटना 5 अक्टूबर 2018 की है, जिसमें तनुश्री दत्ता ने आरोप लगाया कि अब्दुल सामी सिद्दीकी (आरोपी नंबर 4) ने टाइम्स नाउ के स्टिंग ऑपरेशन में उनके बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे उन्हें मानसिक और भावनात्मक ठेस पहुंची। इस मामले में स्टिंग ऑपरेशन की सीडी को अदालत में सबूत के रूप में पेश किया गया। अदालत ने पाया कि आरोपी को यह नहीं पता था कि उसे रिकॉर्ड किया जा रहा है। भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत अपराध साबित करने के लिए आपराधिक इरादा (Mens Rea) आवश्यक होता है, लेकिन अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई आपराधिक इरादा नहीं था। इस आधार पर, अदालत ने सीआरपीसी की धारा 203 के तहत मामले को खारिज कर दिया।
अदालत ने 7 मार्च 2025 को अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि पहली घटना कानूनी समय-सीमा से बाहर होने के कारण खारिज की गई, और दूसरी घटना में आरोपी का आपराधिक इरादा साबित नहीं हुआ, इसलिए मामला समाप्त किया जाता है। इस फैसले के साथ, अदालत ने बी-समरी रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार कर लिया, जिसका अर्थ है कि पुलिस की जांच में कोई भी आरोप सही नहीं पाया गया और आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
तनुश्री दत्ता का यह मामला भारत में 2018 में शुरू हुए #MeToo आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसमें कई महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामलों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया था। हालांकि, अदालत के इस फैसले के बाद नाना पाटेकर, गणेश आचार्य, राकेश सारंग और अब्दुल सामी सिद्दीकी को कानूनी रूप से क्लीन चिट मिल गई है।
