'छात्रों के लिए अभिभावक 'अपार ID' बनवाएं, इसे अनिवार्य नहीं कर सकते', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई अपार (एपीएएआर) योजना के तहत प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की एक विशिष्ट और आजीवन मान्य पहचान संख्या दी जाती है। यह सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड के एक डिजिटल भंडार के तौर पर काम करता है।

SC on Apaar Ids: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने एक अहम फैसले में कहा कि ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) योजना के तहत बच्चों के लिए 'वन स्टूडेंट, वन यूनिक आईडी' बनाना अभिभावकों के लिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट का यह फैसला 24 करोड़ छात्रों पर लागू होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सरकार 'अपार’ योजना को स्वैच्छिक बताती है, लेकिन व्यवहार में बच्चों को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजना को वैकल्पिक बताया गया है, लेकिन इसे आधार से जोड़ दिया गया है, ऐसे में 'अपार’ आईडी लेने के लिए पहले आधार पहचानपत्र बनवाना लगभग अनिवार्य हो जाता है।

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अपार आईडी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को ओडिशा उच्च न्यायालय के उस निर्देश को पूरे देश में लागू करने का आदेश देगा, जिसमें ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी जारी करने के लिए सहमति-पत्र में अभिभावकों को सहमति देने से इनकार करने या इस योजना से बाहर रहने का विकल्प देने का प्रावधान करने को कहा गया है।

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