प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जनसुराज पार्टी की मांग थी कि बिहार में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव को रद्द किया जाए और फिर से चुनाव हो। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है और जनसुराज को पटना हाईकोर्ट जाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम किसी राजनीतिक दल के कहने पर पूरे राज्य के लिए व्यापक निर्देश जारी नहीं कर सकते।
प्रशांत किशोर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, याचिका पर सुनवाई से इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट जाने को कहा
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। याचिका में बिहार सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये हस्तांतरित किए गए थे। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ’’हम किसी राजनीतिक दल के कहने पर पूरे राज्य के लिए व्यापक निर्देश जारी नहीं कर सकते।’’ पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी यू सिंह को इस आधार पर पटना उच्च न्यायालय में जाने के लिए कहा कि यह मुद्दा सिर्फ एक राज्य से संबंधित है।
जनसुराज की क्या थी मांग?
पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी द्वारा दायर याचिका में 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती दी गई थी। पार्टी ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एक कल्याणकारी योजना के कथित दुरुपयोग के विरोध में राज्य में नए सिरे से चुनाव कराए जाने का अनुरोध किया था। आरोप है कि कर्ज में डूबे राज्य ने चुनाव से ठीक पहले 15,600 करोड़ रुपये बांट दिए जिससे अन्य राजनीतिक दलों को समान अवसर नहीं मिल पाए।
बिहार चुनाव में क्या हुआ था?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी और विपक्षी दलों के ’इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (’इंडिया’ गठबंधन) ने 35 सीट हासिल की जबकि जन सुराज पार्टी (जेएसपी) का खाता भी नहीं खुल पाया और उसके अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
