महिला की सलवार का नाड़ा खोलना 'रेप का प्रयास' है, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के फैसले को पलटा

मार्च 2025 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस फैसले पर काफी जनाक्रोश देखने को मिला था। इसके बाद एनजीओ 'वी द वुमेन' की चिट्ठी पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ज्योमाल्या बागची एवं जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने एचसी के फैसले को खारिज करते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत दो लोगों के खिलाफ दायर रेप के प्रयास के मूल आरोप की समीक्षा की।

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक अहम फैसले में कहा कि किसी महिला के साथ छेड़छाड़ करना और उसकी सलवार का नाड़ा खोलना 'रेप का प्रयास जैसा' है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें अपराध को 'रेप का प्रयास' नहीं बल्कि 'रेप करने की तैयारी' बताया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य को कम गंभीर अपराध मानकर आरोपी को हल्की सजा देना न्याय की भावना के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने इस मामले में केवल महिला की लज्जा भंग करने का मामला माना था।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटा।

मार्च 2025 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस फैसले पर काफी जनाक्रोश देखने को मिला था। इसके बाद एनजीओ 'वी द वुमेन' की चिट्ठी पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ज्योमाल्या बागची एवं जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने एचसी के फैसले को खारिज करते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत दो लोगों के खिलाफ दायर रेप के प्रयास के मूल आरोप की समीक्षा की।

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