Krishna Janmabhoomi-Shahi Eidgah dispute: सुप्रीम कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित सभी मुकदमों को एक साथ जोड़ने और उन्हें एक साथ सुनने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने में अनिच्छा जताई है। अदालत ने कहा कि मथुरा मंदिर-मस्जिद विवाद पर कई याचिकाओं को नत्थी किए जाने के खिलाफ अपील पर बाद में भी सुनवाई की जा सकती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 1 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा। सीजेआई संजीव खन्ना की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा कि सभी मुकदमों की एक साथ सुनवाई के मुद्दे पर हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट
प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने प्रथम दृष्टया सभी वादों के समेकन संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले के पक्ष में निर्णय लिया और कहा कि इससे दोनों पक्षों को फायदा होगा। पिछले वर्ष 11 जनवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामलों को समेकित करने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को सुनवाई की शुरुआत में सुप्रीम कोर्च की पीठ ने कहा कि वह आराधना स्थलों पर 1991 के कानून से संबंधित मुद्दे पर विचार कर रही है और जानना चाहा कि उसे इस समय वादों के समेकन के मामले में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने मस्जिद समिति का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील से कहा, अगर जरूरत लगे तो आप बाद में भी यह याचिका ला सकते हैं। इससे संबंधित एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में शीर्ष अदालत ने 12 दिसंबर को अगले आदेश तक देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों, विशेषकर मस्जिदों और दरगाहों पर दावा करने संबंधी नए मुकदमों पर विचार करने और लंबित मामलों में कोई भी प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगा दी थी।
शुक्रवार को प्रबंधन ट्रस्ट शाही ईदगाह की ओर से उपस्थित एक वकील ने कहा कि वादों की प्रकृति समान नहीं हैं फिर भी उच्च न्यायालय ने उन्हें समेकित किया है। वकील ने कहा कि इससे जटिलताएं पैदा होंगी क्योंकि विभिन्न मुकदमों में सुनवाई एक साथ की जाएगी। पीठ ने कहा, इसमें कोई जटिलता नहीं है... यह आपके और उनके दोनों के हित में है क्योंकि इससे कई कार्यवाहियों से बचा जा सकेगा। हमें (मुकदमों के) समेकन के मुद्दे पर हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए?
सीजेआई ने कहा, अगर इसे समेकित कर दिया जाए तो क्या फर्क पड़ता है? वैसे, इस बारे में सोचें, हम इसे स्थगित कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि समेकन से कोई फर्क नहीं पड़ता। 1 अप्रैल से शुरू होने वाले सप्ताह में (याचिका को) फिर से सूचीबद्ध करें।
क्या है विवाद?
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद के 13.37 एकड़ जमीन को लेकर विवाद है। करीब 11 एकड़ जमीन पर मंदिर है और 2.37 एकड़ जमीन पर मस्जिद है। इस मस्जिद का निर्माण 1669-70 में औरंगजेब ने कराया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था।
वहीं, मुस्लिम पक्ष कहता है कि इसके कोई सबूत मौजूद नहीं हैं कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण एक मंदिर को तोड़कर कराया गया था। शाही ईदगाह मस्जिद ट्रस्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 14 दिसंबर के फैसले को इस आधार पर चुनौती दी है कि ईदगाह मस्जिद की संरचना पर दावा करने वाले हिंदू भक्तों द्वारा दायर याचिकाएं पूजा स्थल अधिनियम 1991 के तहत वर्जित हैं।
