हीमोफीलिया पीड़ित ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, UPSC परीक्षा में विकलांगता के आधार पर मांगा आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने हीमोफीलिया पीड़ित UPSC अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से पूछा कि रक्त विकार को आरक्षण से बाहर क्यों रखा गया। कोर्ट ने कहा कि अनुसूची में शामिल करने के बाद भी लाभ न देना भेदभाव हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को उस याचिका पर सुनवाई करेगी जिसमें मुद्दा उठाया गया है कि हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब हीमोफीलिया को Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के तहत विकलांगता के रूप में मान्यता दी गई है, तो इसे सरकारी नौकरियों में मिलने वाले चार फीसदी के आरक्षण के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है?

हीमोफीलिया से पीड़ित यूपीएससी अभ्यर्थी ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजाका दरवाजा

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट जय़ना कोठारी और एडवोकेट रोहित शर्मा ने दलील दी कि हीमोफीलिया सीधे तौर पर लोकोमोटर डिसेबिलिटी या चलने-फिरने की अक्षमता की स्थिति पैदा करता है। इसके बावजूद इसे कानून की धारा 34 के तहत दिए जाने वाले आरक्षण से बाहर रखना भेदभाव है।

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