क्या अदालत आंखें बंद कर ले और सब कुछ यूं ही होने दे?- डॉग लवर्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हो सकती है कार्रवाई

Stray Dog Case: आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामलों की सुनवाई के दौरान, डॉग लवर्स और उनके संगठनों पर कड़ी टिप्पणियां की हैं।

Stray Dog Case: आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त मौखिक टिप्पणियां कीं और सार्वजनिक सुरक्षा, जवाबदेही और डॉग लवर्स संगठनों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों पर हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई।

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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

डॉग लवर्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

एक नौ वर्षीय बच्चे की आवारा कुत्तों के हमले में मौत का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब ऐसे कुत्तों को डॉग लवर्स संगठन खाना खिला रहे हैं, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है। अदालत ने तीखा सवाल किया, “क्या यह अदालत आंखें बंद कर ले और सब कुछ यूं ही होने दे?” पीठ ने टिप्पणी की कि भावनाएं केवल कुत्तों के लिए दिखाई देती हैं, लेकिन पीड़ितों के दर्द और जान की कीमत को नजरअंदाज कर दिया जाता है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि कुत्तों के काटने से मौत या गंभीर चोट के मामलों में राज्य सरकार को भारी मुआवजा देने का आदेश दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए कुत्ता प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी "जिम्मेदार" और "जवाबदेह" ठहराया जाएगा। न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, ‘‘कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा देने की मांग करेंगे क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में कुछ नहीं किया है। साथ ही, इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते इधर-उधर क्यों घूमते हैं, लोगों को काटते हैं और डराते हैं?’’

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