PM Modi in Somnath: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर में महा पूजा और अन्य अनुष्ठान किए। ये अनुष्ठान भगवान शिव को समर्पित पुनर्निर्मित मंदिर के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के अंतर्गत किए गए। सोमनाथ में रोड शो करने के बाद प्रधानमंत्री मंदिर में प्रवेश कर गए और वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच शिवलिंग पर पवित्र जल चढ़ाने की रस्म 'महा पूजा' और 'जलभिषेक' की।
सोमनाथ में पीएम मोदी (X/@BJP4India)
पीएम मोदी ने 'कुंभभिषेक' भी देखा, जिसमें देश भर के प्रमुख तीर्थ स्थलों से एकत्रित पवित्र जल को क्रेन की सहायता से मंदिर के शिखर पर छिड़का गया। सोमनाथ अमृत महोत्सव का आयोजन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1951 में जीर्णोद्धार किए गए मंदिर के उद्घाटन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उनके उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के साथ, भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम (SKAT) द्वारा मंदिर के ऊपर प्रस्तुत किए गए एयर शो देखने पहुंचे।
स्वदेशी स्मोक पॉड्स का उपयोग करते हुए, सूर्यकिरण टीम के विमानों ने केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआं छोड़कर आकाश में तिरंगे का चित्र बनाया। प्रधानमंत्री ने बाद में सद्भावना मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान क्या-क्या कहा जानिए।
पोखरण में परमाणु परीक्षण
देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। 11 मई को पहले तीन परमाणु परीक्षण किए। भारत की क्षमता को वैज्ञानिकों ने दुनिया के सामने रखा। दुनिया के आंखें लाल हो गईं। दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरीं। अनेक प्रकार के बंधन लग गए। लेकिन हम कोई और मिट्टी के बने हुए हैं। 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी। वैज्ञानिकों ने अपना काम कर लिया था, लेकिन 13 मई को फिर दो और परमाणु परीक्षण हुए। इससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छा शक्ति कितनी अटल है। पोखरण परमाणु परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति नाम दिया। भगवान सोमनाथ के चरणों से सभी देशवासियों को ऑपरेशन शक्ति की वर्षगांठ की भी बधाई देता हूं।
सोमनाथ मंदिर
लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया। वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे! बार-बार इस मंदिर को तोड़ा गया। ये बार-बार बनता रहा, हर बार उठ खड़ा होता रहा। विदेशी हमलावरों ने राष्ट्रीय पहचान से जुड़े स्थलों को नष्ट किया। राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े विषयों पर भी राजनीति होती रही। सोमनाथ खुद इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
राम मंदिर निर्माण का विरोध
राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया गया। हमें ऐसी मानसिकता से सावधान रहना है। इस तरह की संकुचित राजनीति को हमें पीछे छोड़ना होगा। हमें विकास और विरासत को साथ लेकर के आगे बढ़ना होगा।
