Maharashtra Hindi Row: महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर सियासी संग्राम मचा हुआ है। इसे लेकर बीजेपी गठबंधन सरकार और विपक्षी दल आमने सामने हैं। खास तौर पर शिवसेना यूबीटी इसे लेकर काफी मुखर हैं। मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है और बीजेपी-शिवसेना के बीच तलवारें खिंची हुई है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं हैं... वे मराठी लोगों की तुलना पहलगाम के आतंकवादियों से कर रहे हैं, वे असली मराठी हत्यारे हैं... वे हिंदुओं को भी नहीं बचा सकते, वे उन लोगों का साथ दे रहे हैं जो मराठी के साथ अन्याय करते हैं। मूल भाजपा, जिसका शिवसेना के साथ गठबंधन था अब खत्म हो गया है। हम एक साथ आए हैं, और ये लोग तब से गुस्से में हैं।
शिवसेना ने डीएमके की मुहिम की हवा निकाली
इससे पहले रविवार को शिवसेना (यूबीटी) ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के अरमानों पर पानी फेर दिया था। हिंदी के मुद्दे पर स्टालिन द्वारा उद्धव ठाकरे के समर्थन को दरकिनार कर शिव सेना (यूबीटी) ने कहा था कि हिंदी के प्रति पार्टी का विरोध केवल प्राथमिक विद्यालयों में इसे शामिल करने के फैसले के विरोध तक सीमित है।
संजय राउत ने क्या कहा
शिव सेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने कहा, हिंदी थोपे जाने के खिलाफ उनके (डीएमके) रुख का मतलब है कि वे हिंदी नहीं बोलेंगे और न ही किसी को हिंदी बोलने देंगे। लेकिन महाराष्ट्र में हमारा रुख ऐसा नहीं है। हम हिंदी बोलते हैं... हमारा रुख यह है कि प्राथमिक विद्यालयों में हिंदी के लिए सख्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी लड़ाई यहीं तक सीमित है। यह स्पष्ट करते हुए कि ठाकरे बंधुओं का रुख केवल प्राथमिक विद्यालयों में हिंदी थोपे जाने के खिलाफ है, राउत ने स्टालिन को उनकी लड़ाई में शुभकामनाएं दीं, साथ ही सीमा रेखा भी खींची।
