बागी भतीजे का असर, जानें-शरद पवार को वेस्ट महाराष्ट्र- बारामती में लगेगा कितना बड़ा झटका

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Jul 6, 2023, 07:32 AM IST

Sharad Pawar Politics: बारामती और पवार परिवार का अटूट रिश्ता है। लेकिन अब जब चाचा शरद पवार और भतीजा अजित पवार एक दूसरे के आमने सामने हैं तो क्या वो रिश्ता उसी तरह से कायम रहेगा या जमीनी स्तर पर बदलाव होगा उसे यहां पर समझने की कोशिश करेंगे।

Sharad Pawar Politics: 5 जुलाई को चाचा शरद पवार और भतीजा अजित पवार एक साथ मंच साझा नहीं कर रहे थे। मंच साझा करने की कोई वजह भी नहीं थी। एमईटी में जहां अजित पवार ने शक्ति प्रदर्शन किया वहीं वाईबी सेंटर में शरद पवार का गुट भी शक्ति प्रदर्शन कर रहा था। लेकिन विधायकों की संख्या में अजित पवार आगे निकले। हालांकि मैजिक नंबर 36 से पीछे रहे। यह वो नंबर है जो उन्हें और उनके समर्थकों को दल बदल से बचाने के लिए जरूरी है। इन सबके बीच हम महाराष्ट्र के उस इलाके की चर्चा करेंगे जिसका मतलब ही शरद पवार है। बात यहां पश्चिम महाराष्ट्र और बारामती की हो रही है।

2019 में पश्चिम महाराष्ट्र में शानदार कामयाबी

2019 के विधानसभा चुनावों के दौरान पश्चिम महाराष्ट्र की कुल 58 सीटों में से 22 पर कब्जा एनसीपी ने कब्जा किया था। 2014 के मुकाबले एनसीपी की ताकत 41 सीटों से बढ़कर 54 सीट की हो गई। 2020 में पार्टी की हार के कारण एनसीपी की सीटें घटकर 53 रह गईं। पंढरपुर-मंगलवेधा सीट पर उपचुनाव में बीजेपी को जीत मिली है। क्षेत्र की शेष 36 सीटों में से भाजपा को 18, शिवसेना को चार, कांग्रेस को आठ और अन्य को छह सीटें मिली थीं।छह महीने पहले लोकसभा चुनावों में पश्चिमी महाराष्ट्र ने सुप्रिया सुले (Baramati), श्रीनिवास पाटिल (Satara) और अमोल कोल्हे (Shirur) में एनसीपी के चार में से तीन सांसद चुने।मौजूदा सत्ता संघर्ष में सुले, कोल्हे और पाटिल ने वरिष्ठ पवार का समर्थन किया है जबकि रायगढ़ से पार्टी के चौथे सांसद सुनील तटकरे अजीत खेमे के साथ हैं और उन्हें राज्य इकाई का नया प्रमुख बनाया गया है। बुधवार को जब अजित खेमे ने एमईटी, बांद्रा में अपना शक्ति प्रदर्शन किया, तो पश्चिमी महाराष्ट्र के 22 में से 17 विधायक मौजूद थे। वहीं बाकी पांच विधायक वाईबी चव्हाण सभागार में मौजूद थे जहां शरद पवार ने भाषण दिया था।

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