कांग्रेस से अलग होने के करीब एक दशक बाद गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला, जिन्हें प्यार से 'बापू' कहा जाता है, एक बार फिर उस पार्टी के दरवाजे पर हैं, जिसमें उन्होंने एक लंबी और नाटकीय राजनीतिक यात्रा के बाद प्रवेश किया था। वाघेला की कांग्रेस में वापसी को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने पुष्टि की है कि वाघेला और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच चर्चा चल रही है। वाघेला ने भी संकेत दिया है कि गांधी परिवार से मुलाकात के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला (फाइल फोटो)
अगर यह वापसी होती है, तो यह वाघेला के राजनीतिक करियर का एक और बड़ा मोड़ होगा। उन्होंने गुजरात की राजनीति को कई बार नई दिशा दी है। कभी RSS प्रचारक रहे वाघेला भाजपा के शुरुआती गुजरात संगठन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। 1996 में भाजपा से बगावत के बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता पार्टी बनाई और कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने।
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इसके बाद 1998 में उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। बाद में वे केंद्र में मंत्री और गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। 2017 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी।
जब रणदीप सुरजेवाला ने गुजरात कांग्रेस के प्रभारी का पद संभाला
कई स्थानीय नेताओं की ओर से वाघेला को कांग्रेस में वापस आने के लिए कथित तौर पर आग्रह किए जाने के बीच प्रक्रिया ने उस समय गति पकड़ी, जब रणदीप सुरजेवाला ने गुजरात कांग्रेस के प्रभारी का पद संभाला। वाघेला की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उनका चुनावी अनुभव नहीं, बल्कि गुजरात भर में उनका राजनीतिक नेटवर्क और पहचानी जाने वाली राजनीतिक छवि भी है।
कांग्रेस के लिए यह समय अहम है
पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन को फिर से मजबूत करने और भाजपा के खिलाफ अपनी चुनौती बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अगर वाघेला का प्रस्तावित पूर्ण विलय होता है, तो गठबंधन के बजाय वे सीधे कांग्रेस के चुनावी अभियान और रणनीतिक तंत्र का हिस्सा बन सकते हैं। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, बातचीत उन्नत चरण में है और अब तक घटनाक्रम सकारात्मक रहा है।
