एसएफआई के सदस्यों ने दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान अपने साथ हुई कथित मारपीट और दुर्व्यवहार की सोमवार को आपबीती सुनाई। उन्होंने चोट के निशान दिखाते हुए आरोप लगाया कि हिरासत में लेने के बाद उन्हें बसों में पीटा गया और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ सुरक्षाकर्मियों ने यौन उत्पीड़न किया।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद SFI सदस्यों का आरोप
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थप्पड़ मारे जाने के कारण एक प्रदर्शनकारी की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के अध्यक्ष आदर्श एम. साजी और नेता आइशी घोष, नादिया तथा शरण्या सहित अन्य ने अपने चोट के निशान दिखाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने असहमति की आवाज दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया।
घोष ने कहा कि उन्हें लगी चोटें अन्य छात्रों को आई चोटों की तुलना में मामूली हैं। अपने चोट के निशान दिखाते हुए उन्होंने कहा, 'छात्रों को जिस तरह की चोटें आई हैं, उनकी तुलना में यह कुछ भी नहीं है।' उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के हाथ-पैर में चोटें आई हैं और हिरासत में लेने के बाद उन्हें वैन के अंदर पीटा गया।
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'महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की'
एसएफआई की दिल्ली इकाई की अध्यक्ष नादिया ने बताया कि हिरासत में लिए जाने के बाद एक वाहन के अंदर महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की।उन्होंने आरोप लगाया, 'छह महिला पुलिसकर्मी मेरी दोस्त को वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश कर रही थीं, जबकि पांच ने मुझे घेर रखा था।'
नादिया ने कहा कि एक पुलिसकर्मी ने उनके हाथ पर मारा, जबकि दूसरी ने उनके बाल खींचे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी उनकी उंगली भी मरोड़ने की कोशिश कर रहा था, जिससे उन्हें काफी दर्द हुआ।एसएफआई की एक सदस्य ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
'कथित तौर पर दाहिने कान पर कई बार थप्पड़ मारे गए'
एसएफआई के प्रदर्शनकारियों ने बताया कि केरल के एक प्रदर्शनकारी, जिनकी पहचान साथी प्रदर्शनकारियों ने फिदेल के रूप में की, को कथित तौर पर दाहिने कान पर कई बार थप्पड़ मारे गए, जिससे उनकी सुनने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई। उन्होंने बताया कि फिदेल को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया।प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गईं माकपा नेता वृंदा करात ने दिल्ली में अपने दशकों के अनुभव में पुलिस की इस कार्रवाई को 'अभूतपूर्व' बताया।
'आज जो हो रहा है, वह अभूतपूर्व है'
उन्होंने कहा, 'दिल्ली की सड़कों पर दशकों से सक्रिय रहने के अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकती हूं कि आज जो हो रहा है, वह अभूतपूर्व है।' करात ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने के लिए पुलिसकर्मियों को बिना किसी रोक-टोक के कार्रवाई करने दी जा रही है।करात ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ अनुचित तरीके से छूने और यौन उत्पीड़न की घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा, 'आज वर्दीधारियों द्वारा यौन उत्पीड़न असहमति की आवाज को दबाने का एक जरिया बन गया है।'
'वामपंथी दल इन पाबंदियों के खिलाफ लोगों को गोलबंद करना जारी रखेंगे'
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव एम ए बेबी ने कहा कि वामपंथी दल इन पाबंदियों के खिलाफ लोगों को गोलबंद करना जारी रखेंगे और इसके लिए नागरिक संगठनों, बुद्धिजीवियों तथा सांस्कृतिक जगत के साथ मिलकर काम करेंगे। बेबी ने कहा, 'आप बैरिकेड लगा सकते हैं, लेकिन किसी भी दमनकारी ताकत से लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को दबाया नहीं जा सकता।'
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की
ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और दिल्ली में प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों के विरोध में किए गए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। छात्र समूहों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि जब प्रदर्शनकारी राजधानी में अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया।
