'एक लाख देकर छूट जाता है रेप का आरोपी', त्रिपुरा के कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, CJI सूर्यकांत की पीठ ने जारी किया नोटिस

जमातिया कस्टमरी लॉ एक्ट, 2017 त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) द्वारा संविधान की छठी अनुसूची के तहत बनाया गया कानून है। इसका उद्देश्य त्रिपुरा के जमातिया जनजातीय समुदाय की पारंपरिक रीति-रिवाजों और विवाद निपटाने की व्यवस्थाओं को कानूनी रूप देना है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को त्रिपुरा के जमातिया कस्टमरी लॉ एक्ट, 2017 के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर त्रिपुरा सरकार और त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कानून की धारा 143 गंभीर अपराधों, जिनमें बलात्कार भी शामिल है, को एक लाख रुपये तक का जुर्माना देकर समझौते के जरिए निपटाने की अनुमति देती है।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मधुमिता भट्टाचार्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।

End of Feed