पति-पत्नी की बातचीत की गुप्त रिकॉर्डिंग का वैवाहिक मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है: न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह दलील खारिज कर दी कि इस तरह के साक्ष्य को अनुमति देने से घरेलू सौहार्द और वैवाहिक संबंध खतरे में पड़ सकते हैं, क्योंकि इससे जीवनसाथी की जासूसी को भी बढ़ावा मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पति-पत्नी की गुप्त रूप से रिकॉर्ड की गई बातचीत तलाक की कार्यवाही सहित सभी वैवाहिक मामलों में सबूत के तौर पर स्वीकार्य है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पति-पत्नी का एक-दूसरे पर नजर रखना इस बात का सबूत है कि उनकी शादी मजबूत नहीं चल रही है और इसलिए इसका इस्तेमाल न्यायिक कार्यवाही में किया जा सकता है।

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