पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच मंगलवार को कोलकाता में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। यह झड़प मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के बाहर उस समय भड़की, जब टीएमसी समर्थित बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) मतदाता सूची में कथित हेरफेर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए।
कलकत्ता में भिड़े भाजपा और टीएमसी के कार्यकर्ता।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डी.पी. सिंह ने बताया कि भिड़ंत के दौरान कई वाहनों को नुकसान पहुंचा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि “घटनास्थल पर फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है।”
झड़प से ठीक पहले भाजपा के नेता प्रतिपक्ष सुभेंदु अधिकारी ने सीईओ से मुलाकात की थी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अधिकारी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी शांति भंग कराने की कोशिश कर रही हैं। इसके कुछ ही घंटे बाद टीएमसी समर्थकों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और थोड़ी ही देर में विवाद ने उग्र रूप ले लिया।
टीएमसी की ओर से आरोप है कि भाजपा समर्थक फॉर्म-6 (नए मतदाता पंजीकरण का फॉर्म) का दुरुपयोग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भाजपा बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे एनडीए शासित राज्यों के लोगों को बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में जोड़ने की कोशिश कर रही है। टीएमसी के नेताओं ने दावा किया कि भाजपा ने एक ही दिन में 30,000 से अधिक फॉर्म-6 जमा कराए हैं, जो संदिग्ध है।
उधर, सीईओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थकों ने उन्हें उकसाया और उन पर हमला किया। एक प्रतिनिधि ने कहा, “हमारे सदस्यों पर पहले हमला हुआ। हम इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।” भाजपा की ओर से जवाब देते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि टीएमसी समर्थकों ने जानबूझकर प्रदर्शन को हिंसक बनाया।
कुछ ही देर में हालात बिगड़ते देख पुलिस ने बल प्रयोग किया और भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार केवल न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। स्ट्रैंड रोड स्थित सीईओ कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और इलाके को संवेदनशील घोषित कर दिया गया है।
