MDR on UPI Charges: दो हजार रुपये से अधिक के कमर्शियल यूपीआई पेमेंट पर लगाए गए चार्ज के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में इस पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा हैं। केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI कमेटी को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि ये बताएं कि ये फीस है, टैक्स है या कुछ और है।
UPI पेमेंट को लेकर SC का केंद्र को नोटिस
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने नोटिस जारी किया। वकील अंजन दत्ता की ओर से दायर याचिका में इस संबंध में 14 दिसंबर की जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी किए गए MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने बिना पर्याप्त कानूनी आधार के यह फैसला लिया है।
सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिली
₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही 15 अक्टूबर 2026 से नई MDR व्यवस्था लागू होने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस फैसले का आधार स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने को कहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि इस तरह का शुल्क लगाने के लिए कार्यपालिका के पास क्या अधिकार क्षेत्र है और इस वसूली की कानूनी प्रकृति क्या है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक, NPCI को नोटिस जारी किया है। कोर्ट इस मामले में एडवोकेट अंजन दत्ता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में केंद्र के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को जारी MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है।
₹2,000 से ज्यादा की रकम पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू
नई व्यवस्था के तहत सामान्य यदि कोई व्यक्ति किसी मर्चेंट को UPI ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से ज्यादा की रकम पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि, यह चार्ज सीधे आम यूजर से लेने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि मर्चेंट साइड पर लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 15 अक्टूबर से ही नई व्यवस्था लागू होगी और करीब 96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन इस चार्ज से बाहर रहेंगे। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं होगा। केंद्र ने यह भी बताया कि आवश्यक सेवाओं और कम मार्जिन वाले सेक्टरों के लिए अलग व्यवस्था है। ऐसे सेक्टरों में ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है।
याचिकाकर्ता अंजन दत्ता का कहना है कि नए MDR फ्रेमवर्क को पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श, पारदर्शिता और वैधानिक सुरक्षा के बिना लागू किया गया है और इसका अप्रत्यक्ष बोझ आखिरकार आम नागरिकों पर पड़ सकता है।
