CEC Appointment Row: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून की वैधता को चुनौती देने वाली अर्जियों पर अपनी सुनवाई टाल दी। इस कानून में चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से देश के प्रधान न्यायाधीश को बाहर रखा गया है। चयन समिति से सीजआई को बाहर रखने को चुनौती दी गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति हुई है। ज्ञानेश ने बुधवार को सीईसी पद का कार्यभार संभाल लिया। कांग्रेस सहित विपक्षी दल इस नियुक्ती का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संविधान की भावनाओं के अनुरूप काम नहीं कर रही है।
CEC की नियुक्ति वाले कानून को चुनौती देने वाली अर्जियों पर सुनवाई टली।
न्यायालय के आदेश की मूल भावना का घोर उल्लंघन-राहुल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नए सीईसी की नियुक्ति के बाद मंगलवार को आरोप लगाया कि ऐसे समय में यह निर्णय आधी रात को लेना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के लिए गरिमा के प्रतिकूल है, जब चयन समिति की संरचना और प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है और 48 घंटे से भी कम समय में सुनवाई होनी है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार का यह कदम वर्ष 2023 में आए उच्चतम न्यायालय के आदेश की मूल भावना का घोर उल्लंघन है।
सोमवार को हुई ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार शाम को आयोजित चयन समिति की बैठक के बाद ज्ञानेश कुमार को भारत के नए सीईसी के रूप में नियुक्त किया गया। इस समिति में गृह मंत्री और राहुल गांधी भी शामिल हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अपना असहमित नोट ‘एक्स’ पर साझा किया जिसमें उन्होंने पैरवी की थी कि न्यायालय की सुनवाई तक इस बैठक को टाला जाना चाहिए। यह बैठक सोमवार शाम संपन्न हुई और फिर देर रात कुमार के चयन की अधिसूचना जारी की गई।
मैंने असहमति नोट प्रस्तुत किया-राहुल
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘अगले मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन करने के लिए हुई समिति की बैठक के दौरान मैंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को एक असहमति नोट प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया था कि कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त एक स्वतंत्र चुनाव आयोग का सबसे बुनियादी पहलू चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की प्रक्रिया है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करके और भारत के प्रधान न्यायाधीश को समिति से हटाकर, मोदी सरकार ने चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी को लेकर करोड़ों मतदाताओं की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
'आदर्शों को कायम रखना हमारी जिम्मेदारी'
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘नेता प्रतिपक्ष के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि मैं बाबासाहेब आंबेडकर और हमारे नीति निर्माता नेताओं के आदर्शों को कायम रखूं और सरकार को जिम्मेदार ठहराऊं। ’ राहुल गांधी ने कहा कि समिति की संरचना और प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है और 48 घंटे से भी कम समय में सुनवाई होनी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में नए सीईसी का चयन करने के लिए आधी रात को निर्णय लेना प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की गरिमा के प्रतिकूल और असभ्य दोनों है।
