Sanjay Singh Files Nomination: दिल्ली से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 19 जनवरी को होने वाले चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों संजय सिंह, स्वाति मालीवाल और एनडी गुप्ता ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। संजय सिंह, सुशील कुमार गुप्ता और एन डी गुप्ता का छह साल का कार्यकाल 27 जनवरी को समाप्त हो रहा है। इस बार आप ने सुशील गुप्ता की जगह दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष मालीवाल को उम्मीदवार बनाया है।
राज्यसभा चुनाव
19 जनवरी को चुनाव
निर्वाचित होने के बाद एनडी गुप्ता और संजय सिंह का दूसरा कार्यकाल होगा। अधिकारियों ने बताया कि स्वाति मालीवाल, एनडी गुप्ता और संजय सिंह ने सिविल लाइंस स्थित दिल्ली परिवहन आयुक्त कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया। अगर आवश्यक हुआ तो तीन रिक्तियों को भरने के लिए चुनाव 19 जनवरी को होगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 9 जनवरी है जबकि नामांकन पत्रों की जांच 10 जनवरी को होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 12 जनवरी है।
अदालत ने संजय सिंह की जमानत याचिका पर ईडी से जवाब मांगा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित धन शोधन मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की जमानत याचिका पर सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने जांच एजेंसी को नोटिस जारी किया और मामले में अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की। पिछले साल चार अक्टूबर को ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए राज्यसभा सदस्य ने धन शोधन मामले में अपनी जमानत याचिका खारिज करने के निचली अदालत के 22 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी है।
पिछले तीन महीने से हिरासत में
संजय सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने कहा कि वरिष्ठ आप नेता पिछले तीन महीने से हिरासत में हैं और इस अपराध में उनकी कोई भूमिका सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि ईडी के स्टार गवाह के बयान के बाद सिंह को गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने आरोप लगाया है कि सिंह ने अब खत्म हो चुकी आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे कुछ शराब निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को धन लाभ हुआ। निचली अदालत ने कहा था कि वह अपराध से दो करोड़ रुपये तक की अर्जित आय के मामले से जुड़े हुए थे और उनके खिलाफ मामला वास्तविक था। यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के निर्माण और इसे लागू करने में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। (भाषा-एएनआई इनपुट)
