राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले मोहन भागवत का संदेश, बताया- मंदिर विध्वंस के पीछे विदेशी आक्रांताओं की क्या थी सोच

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 21, 2024, 11:26 AM IST

मोहन भागवत ने अपने संदेश में बताया कि इस्लाम के नाम पर पश्चिम से हुए आक्रमण का लक्ष्य क्या था। क्यों विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में मंदिरों को भी नष्ट कर दिया।

Ayodhya Ram Mandir pran pratishtha: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में केवल दो दिन शेष रह गये हैं और पूरी अयोध्या नगरी धार्मिक उत्साह से सराबोर है। 22 जनवरी को देश-विदेश की नामी हस्तियां अयोध्या पहुंचेंगी और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के ऐतिहासिक क्षणों की साक्षी बनेंगी। इससे पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख ने संघ के मुखपत्र में लेख लिखा है और बाया कि किस तरह से विदेशी आक्रांताओं ने भारत में मंदिर विध्वंस कुचक्र रचा।

Mohan Bhagwat

मोहन भागवत

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डेढ़ हजार वर्षों से आक्रांताओं से निरंतर संघर्ष

हमारे भारत का इतिहास पिछले लगभग डेढ़ हजार वर्षों से आक्रांताओं से निरंतर संघर्ष का इतिहास है। आरंभिक आक्रमणों का उद्देश्य लूटपाट करना और कभी-कभी (सिकंदर जैसे आक्रमण) अपना राज्य स्थापित करने के लिए होता था। परंतु इस्लाम के नाम पर पश्चिम से हुए आक्रमण यह समाज का पूर्ण विनाश और अलगाव ही लेकर आए। देश-समाज को हतोत्साहित करने के लिए उनके धार्मिक स्थलों को नष्ट करना अनिवार्य था, इसलिए विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में मंदिरों को भी नष्ट कर दिया। ऐसा उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि अनेकों बार किया। उनका उद्देश्य भारतीय समाज को हतोत्साहित करना था ताकि भारतीय स्थायी रूप से कमजोर हो जाएँ और वे उन पर अबाधित शासन कर सकें।

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