Ritabrata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्यसभा सांसद रुक्मिणी कोयल मलिक के इस्तीफे (Koel Mallick Rajya Sabha resignation) के बाद अब राज्य के विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि कोयल मलिक का इस्तीफा तो महज एक शुरुआत है, आने वाले दिनों में टीएमसी के कई और बड़े नेता पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं।
TMC में बड़ी बगावत
मीडिया से बातचीत करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी के नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "पार्टी के भीतर जिस तरह की तानाशाही, फासीवाद और एकतरफा फैसले लेने की व्यवस्था बनाई गई है, वह लोकतंत्र के लिए बेहद नुकसानदेह है।" बनर्जी ने आगे कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है, लेकिन टीएमसी में केवल 'मोनोलॉग' (एकतरफा बात) होती है, जिसके कारण नेताओं का दम घुट रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी तानाशाही हावी होती है, उसके खिलाफ बगावत सुर उठाती है। यही वजह है कि अब नेता खुलकर इस व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह कर रहे हैं।
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दलबदल का लंबा होता सिलसिला
ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले पुराने साथियों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले सुखेन्दु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी राज्यसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था। अब कोयल मलिक का इस्तीफा भी इसी कड़ी का हिस्सा है। बुधवार को ही ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले मदन मित्रा भी बागी गुट में शामिल हो गए, जिससे टीएमसी को बड़ा झटका लगा है।
ममता बनर्जी का पलटवार
दूसरी तरफ, इन तमाम इस्तीफों और बगावत के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का रुख भी बेहद सख्त है। उन्होंने बागियों को दोटूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन पर भी किसी तरह का 'दबाव' है या जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे 21 जुलाई को होने वाली 'शहीद दिवस' रैली से पहले ही चले जाएं। ममता ने विश्वास जताया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह 2006 की तरह शून्य से दोबारा अपनी पार्टी खड़ी करने का माद्दा रखती हैं।
